राष्ट्रीय मतदाता दिवस- मजबूत लोकतंत्र की नींव है प्रत्येक नागरिक की सक्रिय सहभागिता

अधिकार औऱ कर्तव्य का बोध कराता-मताधिकार

हर वर्ष 25 जनवरी को पूरे देश में राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस नागरिकों को उनके मताधिकार और कर्तव्यों की याद दिलाने के साथ-साथ लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ जनता होती है और इसे सुरक्षित एवं सुदृढ़ बनाए रखने के लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय सहभागिता अनिवार्य है।

भारत के संविधान ने प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार प्रदान किया है। यह केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण कर्तव्य भी है। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह अपने मत का प्रयोग करे और ऐसे प्रतिनिधियों का चयन करे जो समाज और राष्ट्र के हित में निर्णय ले सकें।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर निर्वाचन आयोग एवं जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों, पंचायत भवनों एवं सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इन अभियानों के माध्यम से विशेष रूप से युवा मतदाताओं को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों के महत्व से अवगत कराया जाता है। साथ ही यह भी बताया जाता है कि मतदान केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने और शासन व्यवस्था में सुधार लाने का सशक्त माध्यम है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार तभी जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नीतियां बना सकती है, जब अधिक से अधिक नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करें। मतदान से न केवल शासन में पारदर्शिता आती है, बल्कि समाज में जिम्मेदारी और सहभागिता की भावना भी सुदृढ़ होती है।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने लोकतांत्रिक कर्तव्यों का निर्वहन करें, मतदान में सक्रिय रूप से भाग लें और अपने परिवार एवं समाज को भी मतदान के लिए प्रेरित करें। साथ ही 18 वर्ष पूर्ण कर चुके अथवा शीघ्र 18 वर्ष पूर्ण करने वाले युवा अपने नाम मतदाता सूची में अवश्य दर्ज कराएं, ताकि भारत का लोकतंत्र और अधिक मजबूत, पारदर्शी एवं प्रगतिशील बन सके।

विजय मानिकपुरी

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