भारतीय स्टार्टअप्स ने बजट 2026 में कर राहत की मांग की

नई दिल्ली : भारतीय स्टार्टअप कंपनियों ने आगामी केंद्रीय बजट 2026 में कर छूट की समय-सीमा बढ़ाने तथा पूंजीगत लाभ कर में राहत देने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा तथा कर बचत से प्राप्त राशि का उपयोग कारोबार विस्तार और प्रौद्योगिकी में निवेश के लिए किया जा सकेगा।

उद्योग जगत के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 से सभी निवेशकों के लिए एंजेल टैक्स को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा से निवेश माहौल में सुधार आया है। हालांकि अब स्टार्टअप्स तथा निवेशकों खासकर विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए पूंजीगत लाभ कर में भी राहत की आवश्यकता है।

एंजेल टैक्स समाप्त हो चुका है

एंजेल टैक्स वह कर था जो स्टार्टअप को उसके शेयर के उचित बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर निवेश मिलने पर अतिरिक्त राशि पर लगाया जाता था। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप ‘एआसोक’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीण सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सुधारों ने मजबूत आधार तैयार किया है तथा आगामी बजट इन सुधारों को जमीनी स्तर पर लागू करने का अवसर प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि एंजेल टैक्स हटने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। अब विदेशी निवेशकों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर को तर्कसंगत बनाने की जरूरत है जो वर्तमान में 12.5 प्रतिशत है। इससे शिक्षा जैसे उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों में वैश्विक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। स्टार्टअप में निवेश से होने वाले लाभ पर पूंजीगत लाभ कर लगता है जो अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक होता है। यदि शेयर 24 महीने से कम समय में बेचे जाते हैं तो अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर लागू होता है जबकि 24 महीने से अधिक पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर लागू होता है।

छूट की समय-सीमा 2035 तक बढ़ाई जाए

उद्योग जगत आयकर कानून की धारा 80-आईएसी के तहत डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को लाभ पर 100 प्रतिशत आयकर छूट की समय-सीमा बढ़ाने की मांग कर रहा है। यह छूट कंपनी के शुरुआती 10 वर्षों में किसी भी लगातार तीन वर्षों के लिए उपलब्ध है लेकिन वर्तमान में पात्रता एक अप्रैल 2030 तक सीमित है।

स्टार्टअप्स चाहते हैं कि इसे 2032 या 2035 तक बढ़ाया जाए। निर्माण क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप ‘पावरप्ले’ के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ईश दीक्षित ने कहा कि एंजेल टैक्स हटना शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स के लिए महत्वपूर्ण कदम है लेकिन विदेशी निवेश से जुड़े पूंजीगत लाभ कर को लेकर अभी स्पष्टता तथा राहत जरूरी है।

सेवा क्षेत्र के स्टार्टअप ‘यूक्लीन’ के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुणाभ सिन्हा ने कहा कि सेवा आधारित तथा परिसंपत्ति प्रधान स्टार्टअप फर्मों के लिए किफायती ऋण तक बेहतर पहुंच आवश्यक है। उन्होंने ब्याज सब्सिडी योजनाओं या प्राथमिकता क्षेत्र ऋण का दर्जा विस्तार का सुझाव दिया।

ट्रैक्सन के आंकड़ों के अनुसार भारतीय प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स ने 2025 में 10.5 अरब डॉलर का वित्त जुटाया जो 2024 के 12.7 अरब डॉलर से 17 प्रतिशत तथा 2023 के 11 अरब डॉलर से चार प्रतिशत कम है।

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