चुनावी फायदे के लिए 13 की जगह 53 क्रासिंग बना डाला चुनाव जीतते ही 29 क्रासिंग को बंद करना पड़ा

आइल मिल क्रासिंग की अंततः हुई जांच
दिलीप गुप्ता
सरायपाली :- चुनाव में किए गए वायदे कितने खतरनाक , लुभावने व झूठे होते हैं यह सर्वविदित है । चुनाव लड़ने वाले को मालूम होता है कि वह जो आम जनता को झूठे व लुभावने दे रहा है वह नियमतः पूरे नहीं किए जा सकेंगे किंतु वोट लेने के चक्कर में तथा प्रत्याशियों की बातों पर भरोसा करके विजयी बना दिए जाने के बाद मतदाताओं को वास्तविकता का एहसास होता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है और विजयी प्रत्याशी भी पहुंच से दूर हो जाता है । विजयी प्रत्याशी से किए वायदे की जब बात मतदाता करता है तो दूसरे के ऊपर आरोप मढ कर जिम्मेदारी व किए गए वायदे से बचने का प्रयास करता है । कुछ इसी तरह की घटना सरायपाली नगरपालिका चुनाव में घटित हुई । नपाध्यक्ष के सीधे चुनाव में एक प्रत्याशी द्वारा कुछ इसी तरह के झूठे वायदे नगरवासियों , व्यवसायियों व मतदाताओं से चुनाव जीतने के एवज में किया गया था । अब जब वायदों को पूरा करने व सुविधाओं को उपलब्ध कराए जाने की बारी आई तो पूरा दोष गलत किए कार्यों का विरोध करने वालो व किए गए कार्यों के खिलाफ समाचार प्रकाशन करने वाले संवाददाता पर दोष मढ़ा जा रहा है । गलत व झूठे वायदे करने वाले इन नेताओं को अब मुंह छिपाते बन नहीं रहा है ।नगरीय चुनाव के समय पार्टी कार्यकर्ताओं , संगठन व ईमानदार मतदाताओं के काफी विरोध के बाद भी जब टिकिट मिल गई व जीत मिलने के बाद विजयी प्रत्याशी के व्यवहार में काफी परिवर्तन भी आया ।


चुनाव के समय व्यापारियों की सुविधा को प्रमुखता देते हुवे गौरवपथ में बन रहे डिवाइडर व क्रासिंग को बेतहाशा ढंग से खुश करने की नियत से छोड़ा गया था । पूर्व नपाध्यक्ष अमृत पटेल ने बताया कि उनके कार्यकाल के समय में सुरक्षित , बेहतर व सुगम यातायात को देखते हुवे 12-13 ही अलग अलग क्रासिंग दिया गया था वहीं डिवाइडर की ऊंचाई भी इसलिए अधिक रखी गई थी कि सामने से आने वाली गाड़ियों की लाइट से बचा जा सके । इस व्यवस्था से कुछ व्यापारी नाराज थे कि कम क्रासिंग व ऊंचे डिवाइडरों से उनकी दुकान नहीं दिखेगी व ग्राहकों को दुकान तक आने में होने वाले परेशानियों से व्यवसाय प्रभावित होगा । व्यापारियों के इसी परेशानियों को अपना हथियार बनाकर चुनाव के समय मनमाने ढंग से 13 की जगह 53 क्रासिंग जगह जगह छुड़वा दिया गया । डिवाइडर की ऊंचाई को भी आधा कर दिया गया । बताया गया कि डिवाइडर में लगने वाले पौधों को मवेशियों से नुकसान होगा जबकि अभी बनाए गए जाली से बछड़े तक की पहुंच तक पहुंच जायेंगे ये पौधे ।चूंकि इस समय राज्य व नगरपालिका में सत्ता भी बदल गई व प्रभारी नपाध्यक्ष भी बन जाने से सीएमओ व ठेकेदार दोनों इनके दबाव में आकर सही व गलत किए जा रहे बेहद असुरक्षित कार्यों को किए जाने से आंखे बंद कर कार्यों को अंजाम दिलवाया गया । इसका फायदा चुनाव में मिला व विजयी भी हो गए । बाद में इस अवैध रूप से बनाए गए क्रासिंग के खिलाफ इस संवाददाता द्वारा लगातार समाचार का प्रकाशन व क्रासिंग पर हो रही दुर्घटनाओं के खिलाफ समाचार प्रकाशन को युवा कांग्रेस द्वारा तत्कालीन एसडीएम नम्रता चौबे को शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद एसडीएम ने भी इसे गैर सुरक्षित मानते हुवे तत्काल सीएमओ को अवांछित क्रासिंग को बंद किए जाने का आदेश दिया गया था जिसके तहत इन अवांछनीय क्रासिंग को 18/7/25 से बंद किए जाने का कार्य प्रारंभ किया गया । अवैधानिक रूप से बनाए गए 53 क्रासिंग में 29 क्रासिंग को बंद करना ही नगरवासियों की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है ।


इसी तरह काफी दिनों तक कुछ व्यवसायियों के कहने व उन्हें खुश रखने के चक्कर में अग्रसेन चौक से जयस्तंभ चौक तक डिवाइडर का निर्माण ही नहीं किया गया । जानबूझकर साहब आयेंगे इंजीनियर आयेगा का बहाना बनाते कई महीनों तक इस स्थान पर डिवाइडर का निर्माण रोक के रखा गया । जबकि नगरवासियों का कहना था कि सर्वाधिक भीड़ होने के कारण सबसे अधिक दुर्घटनाओं का खतरा भी यहीं बना रहता था । जनमानस के मंशा के अनुरूप ” आज की जनधारा ” द्वारा इस डिवाइडर को बनाए जाने की आवश्यकता को देखते हुवे लगातार समाचारों के प्रकाशन के बाद अंततः अग्रसेन चौक से जयस्तंभ चौक तक के डिवाइडर का निर्माण कार्य 11/11/25 से प्रारंभ हुआ ।


अनाधिकृत रूप से बनाए गए 53 क्रासिंग में किंतु इसके बावजूद आज भी नगर में 24 क्रासिंग छोड़ा गया है । जिसमें 5 ऐसे क्रासिंग हैं जिन्हें बंद किया जाना सुरक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक है । जिनमें 2 क्रासिंग क्रमशः ऑइल मिल के सामने जिसकी चौड़ाई ही 50 – 60 फिट है इसे अनावश्यक रूप से छोड़ा गया है जबकि इसके कुछ ही मीटरों के आगे डिवाइडर की शुरुवात होती है । कहा जाता है कि ठेकेदार व आइल मिल मालिक की आपस में रिश्तेदारी है इसलिए रिश्तेदारी निभाते हुवे अनावश्यक रूप से उक्त सुविधा नगरपालिका द्वारा प्रदान कर दी गई है । इस क्रासिंग की जांच हेतु एसडीएम द्वारा 3 सदस्यों की एक जांच समिति का गठन विगत 10/12/25 को किया गया था व तीन दिनों में जांच रिपोर्ट दिए जाने का आदेश भी दिया गया था कल जांच टीम द्वारा जांच की गई है । इसी तरह कुछ दूरी पूर्व हनुमान मंदिर के सामने भी 50- 60 फिट चौड़ा क्रासिंग छोड़ा गया था जिसे बाद में आधा कम कर दिया गया । जबकि झिलमिला चौक से बैतारी चौक तक कोई रिहायशी मकान एक कालोनी को छोड़कर नहीं है जबकि कालोनी के लिए अलग से क्रासिंग काफी विरोध के बाद छोड़ा गया था ।ऐसे में हनुमान मंदिर के सामने इस क्रासिंग को किसके हित के लिए छोड़ा गया है यह चर्चा का विषय है ।
इसी तरह मंडी के पास कुछ ही दूरी में 3 क्रासिंग पास पास छोड़ा गया है । इसी यह हाईस्कूल मैदान व ओड़िया पारा चौक यह दोनों डिवाइडर एकदम आसपास है व तिगड्डा होने की वजह से दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है यहां भी एक क्रासिंग को बंद किया जा सकता है । वर्तमान में उपरोक्त क्रासिंग के अलावा भंवरपुर चौक , आकाशवाणी चौक ,तहसील कार्यालय , टाटा मोटर्स ,किंग्स पेट्रोल पंप , पोस्ट ऑफिस चौक , बस स्टैंड , ईदगाह , भारत पेट्रोल पंप , हाईस्कूल , ओड़िया पारा , अग्रसेन चौक , जयस्तंभ , दुर्गा चौक , खान पेट्रोल पंप , नई मंडी , सागर स्टेट, जैन कालोनी ,बैदपाली , विश्राम गृह , जगन्नाथ पैट्रोल पंप, झिलमिला चौक ,विश्वनाथ राइस मिल , हनुमान मंदिर , आइल मिल के सामने क्रासिंग छोड़ा गया है ।


इन क्रासिंग में अभी भी भंवरपुर चौक , बस स्टैंड , भारत पेट्रोल पंप , अग्रसेन चौक , जयस्तंभ चौक , झिलमिला चौक , बैदपाली चौक व ऑइल मिल के सामने 50 से 70 फिट तक चौड़ी क्रासिंग छोड़े जाने से दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहेगी । इनकी चौड़ाई सुविधानुसार कम की जानी चाहिए । नगरवासीयों ने भी इस सुझाव का समर्थन किया है नगरवासियों के साथ ही तकनीकी रूप से जुड़े जानकारों का कहना है कि गौरवपथ के साथ ही किसी भी मार्गो में जितनी कम क्रासिंग होगी व अपेक्षाकृत जितनी कम चौड़ाई होती है उतना ही दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है । नगर में जो क्रासिंग व लंबी चौड़ाई छोड़ी गई है वह मानकों पर फिट नहीं बैठती है । इसलिए इन क्रासिंग में आए दिनों घटनाएं घट रही है । इन तकनीकी रूप से जुड़े जानकारों का कहना है कि गौरवपथ , डिवाइडर व बनाई गई नाली ही गलत ढंग से बनाई गई है । नगर में जिस तरह नाली का निर्माण किया गया है वह तकनीकि रूप से अनफिट है । इस नाली से पानी निकासी की संभावना बिल्कुल नहीं है । पर्याप्त रूप से ढाल नहीं दिए जाने के कारण इसमें हमेशा पानी भरे रहेगा जो बाद में रुका पानी गंदगी व बदबू फैलाएगा जिससे स्वास्थ्य पर भी असर पड़ेगा ।


बैतारी स्थित ऑइल मिल के सामने बने अनावश्यक क्रासिंग को बेहतर यातायात सुरक्षा को देखते हुवे तत्काल बंद किए जाने की मांग , शिकायत व लगातार समाचार प्रकाशन के बाद एसडीएम द्वारा जांच टीम गठित की गई थी जिसकी जांच कल की है । नगरवासियों व शिकायतकर्ताओं को अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है । उसके बाद अग्रिम कार्यवाही किए जाने की बात सामने आई है ।

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