गरियाबंद, 21 जनवरी 2026: बाल कल्याण समिति के सदस्यों द्वारा गरियाबंद जिले के आमडी रोड स्थित कलार समाज भवन में संचालित दिव्यांग आश्रम का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान समिति ने आश्रम में रह रहे नाबालिग और दिव्यांग बच्चों की स्थिति का जायजा लिया और संस्था के कामकाज में पाई गई कमियों को दूर करने के निर्देश दिए।
मूलभूत सुविधाओं और स्वच्छता की हुई जांच
बाल कल्याण समिति एक न्यायिक पीठ है जिसका मुख्य दायित्व बच्चों के हितों का संरक्षण करना है। इसी उद्देश्य से समिति की सदस्य मोनिका तिवारी और प्रीति मिश्रा ने आश्रम में बच्चों के रहने की व्यवस्था, खान-पान की गुणवत्ता, साफ-सफाई और उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का गहराई से निरीक्षण किया। सदस्यों ने बच्चों से सीधा संवाद कर उनकी परेशानियों और आवश्यकताओं को समझने की कोशिश भी की।
संस्था का पंजीकरण कराना अनिवार्य
निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि आश्रम में कई नाबालिग और दिव्यांग बच्चे निवासरत हैं। समिति ने संस्था प्रभारी को स्पष्ट निर्देश दिए कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत प्रत्येक बाल देखरेख संस्था का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य है। समिति ने प्रभारी से आग्रह किया कि आश्रम का विधिवत पंजीकरण जल्द से जल्द सुनिश्चित करें।
रिकॉर्ड दुरुस्त रखने की दी गई समझाइश
समिति के सदस्यों ने संस्था प्रभारी को निर्देशित किया कि बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके साथ ही आश्रम से संबंधित सभी कानूनी कागजी कार्यवाही और दस्तावेजों का संधारण सही तरीके से करने की समझाइश दी गई। मौके पर उपस्थित समिति के सदस्यों ने साफ किया कि बच्चों के संरक्षण और उनकी देखभाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।