भाटापारा, 21 जनवरी 2026: तहसील और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय अगल-बगल स्थित हैं, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीण और नगरवासी अपने कामों के लिए पहुँचते हैं। लेकिन यहाँ आने वाले लोगों के चेहरों पर काम होने की खुशी के बजाय परेशानियों के भाव साफ देखे जा सकते हैं। अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के चलते गरीब किसान और आम जनता यहाँ भारी मुसीबत का सामना कर रही है।
पेड़ के नीचे बैठने को मजबूर हैं ग्रामीण
इन दोनों बड़े कार्यालयों में आम जनता के बैठने तक के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। लोग भीषण गर्मी और धूप में कार्यालय परिसर में स्थित पेड़ों के नीचे जमीन पर बैठने को मजबूर हैं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव के साथ-साथ यहाँ व्याप्त प्रशासनिक अव्यवस्था ने हितग्राहियों का जीना मुहाल कर रखा है।
रिश्वतखोरी का खेल: चपरासी से बाबू तक सब लिप्त
स्थानीय तहसील कार्यालय में नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे कार्यों के लिए व्यापक पैमाने पर रिश्वतखोरी की शिकायतें मिल रही हैं। आरोप है कि चपरासी जैसे छोटे पदों से लेकर बाबुओं तक, हर कर्मचारी इस खेल में शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि तहसीलदार को देने के नाम पर हर काम का रेट ‘फिक्स’ कर दिया गया है। बिना पैसे दिए या तो काम होता ही नहीं, या फिर छोटे से काम के लिए वर्षों तक चक्कर काटने पड़ते हैं।
RTI कानून की उड़ रही धज्जियां: सूचना देने में भी आनाकानी
तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली का एक बड़ा उदाहरण नितेश गुप्ता राज का मामला है। उन्होंने 2 जून 2025 को अपनी आलेसुर स्थित जमीन के संदर्भ में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदन लगाया था। जानकारी देने की समय सीमा बीत जाने और तहसीलदार को स्मरण पत्र देने के बावजूद आज तक उन्हें जानकारी नहीं मिली। थक-हारकर उन्होंने अब 5 जनवरी 2026 को अपीलीय अधिकारी (एसडीएम) के समक्ष गुहार लगाई है। सवाल उठता है कि जब तहसीलदार के नाम पर ही रिश्वत मांगी जा रही हो, तो जनता शिकायत किससे करे?
राजस्व मंत्री के जिले में ही ‘सरकार’ फेल?
एक तरफ शासन “हमर सरकार तुम्हर द्वार” का नारा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे भ्रष्ट अफसरों और कर्मचारियों के कारण यह योजना नाकारा साबित हो रही है। गौर करने वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री भी इसी जिले से आते हैं। अब देखना यह होगा कि क्या वे अपने ही जिले के तहसील कार्यालय में चल रही इस लूट-खसोट और अव्यवस्था का संज्ञान लेते हैं या गरीब किसान यूँ ही पिसते रहेंगे।
– राजकुमार मल की रिपोर्ट