महानदी तटवर्ती गांवों में बढ़ा जनआक्रोश, जर्जर पुल और अवैध उत्खनन से ग्रामीण परेशान

कांकेर/चारामा। चारामा विकासखंड के महानदी तटवर्ती गांव इन दिनों लगातार सामने आ रहे विवादों को लेकर चर्चा में हैं। बीते कुछ समय से क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन, जनप्रतिनिधियों को धमकी, और अब बुनियादी ढांचे की बदहाली जैसे मुद्दे एक साथ उभरकर सामने आए हैं, जिससे ग्रामीणों में असंतोष और असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि महानदी के किनारे बसे कई गांवों की रोजमर्रा की जिंदगी सीधे तौर पर नदी और उससे जुड़े संसाधनों पर निर्भर है। लेकिन अवैध गतिविधियों और भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही के कारण न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सार्वजनिक संरचनाएं भी खतरे में आ गई हैं। चारामा क्षेत्र के अरौद घाट स्थित पुल को आसपास के दर्जनों गांवों की आवाजाही का प्रमुख साधन माना जाता है। ग्रामीणों के अनुसार पुल की संरचनात्मक स्थिति कमजोर होती जा रही है। स्लैब से सरिया बाहर दिखना और कुछ हिस्सों का धंसना इस बात का संकेत है कि समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

इसके बावजूद इसी पुल से होकर भारी क्षमता वाले रेत और गिट्टी से भरे ट्रकों का लगातार आवागमन हो रहा है, जिससे पुल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस ओर जिम्मेदार विभागों का ध्यान अब तक नहीं गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी और नियंत्रण किया गया होता तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उनका मानना है कि प्रशासनिक ढिलाई के कारण क्षेत्र में अव्यवस्था बढ़ी है और आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।

हाल ही में जिला कार्यालय पहुंचकर ग्रामीणों ने पुल की तत्काल तकनीकी जांच, भारी वाहनों पर रोक और दीर्घकालीन संरक्षण कार्य की मांग रखी है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य होंगे। महानदी तट पर चल रही व्यावसायिक गतिविधियों और जनहित के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन वह आम जनता की सुरक्षा और पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में किसी ठोस निर्णय की घोषणा नहीं हुई है। अब देखना होगा कि जनआक्रोश के बीच प्रशासन किस तरह स्थिति को संभालता है और क्षेत्र में भरोसा बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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