महासमुंद/सरायपाली। सरायपाली विधानसभा क्षेत्र के ग्राम जंगलबेड़ा में प्रस्तावित सोलर विद्युत परियोजना को लेकर छिड़ा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। क्षेत्रीय विधायक चातुरी नंद ने ग्रामीणों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर महासमुंद को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। विधायक ने परियोजना में नियमों के घोर उल्लंघन, अवैध वृक्ष कटाई और सार्वजनिक संपत्तियों पर कब्जे का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच और निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
5 दिन का अल्टीमेटम: 27 जनवरी से आमरण अनशन की चेतावनी
विधायक चातुरी नंद ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 5 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो वे 27 जनवरी से ग्रामीणों के साथ धरना प्रदर्शन और आमरण अनशन शुरू करेंगी। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
बिना ग्रामसभा सहमति के अवैध निर्माण का आरोप
विधायक ने बताया कि मेसर्स गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड को CSIDC द्वारा 102.930 हेक्टेयर भूमि लीज पर दी गई है। उन्होंने विधानसभा में पूछे गए अपने तारांकित प्रश्न का हवाला देते हुए कहा कि स्वयं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने स्वीकार किया है कि संस्था को ग्रामसभा की एनओसी (NOC) प्राप्त नहीं हुई है। बिना ग्रामसभा की वैधानिक सहमति के काम शुरू करना संविधान, पंचायत अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के ‘समता बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1997)’ के ऐतिहासिक निर्णय का सीधा उल्लंघन है।
नियमों की धज्जियां: तालाब पाटे, काटे गए बेशकीमती पेड़
ज्ञापन में विधायक ने गंभीर आरोप लगाए कि परियोजना स्थल पर बड़े पैमाने पर अवैध वृक्ष कटाई की गई है, जिसकी पुष्टि तहसीलदार की जांच में भी हुई है। यह भारतीय वन अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके अलावा, प्लांट प्रबंधन द्वारा ग्राम पंचायत की निस्तार भूमि पर कब्जा करने, तालाब और एनीकेट को पाटने का कार्य किया जा रहा है।
सार्वजनिक और अंतरराज्यीय मार्ग को किया बाधित
विधायक ने कहा कि जंगलबेड़ा–उड़ीसा सार्वजनिक मार्ग, जो दो राज्यों को जोड़ने वाला वर्षों पुराना संपर्क मार्ग है, उसे भी प्लांट द्वारा बाधित किया जा रहा है। उन्होंने ‘जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य (2011)’ के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि तालाब, चारागाह और सार्वजनिक रास्तों पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। विशेषकर ड्राई एरिया होने के कारण जल स्रोतों को पाटना जल संरक्षण नीति और अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार का हनन है।
विधायक चातुरी नंद की प्रमुख मांगें:
- उच्च स्तरीय जांच: 5 दिनों के भीतर एक विशेष जांच टीम गठित की जाए।
- कार्य पर रोक: जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य तत्काल बंद कराया जाए।
- लीज निरस्तीकरण: नियमों और लीज डीड की शर्तों के उल्लंघन पर लीज रद्द हो।
- दंडात्मक कार्रवाई: अवैध पेड़ कटाई और अतिक्रमण पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो।
- बहाली: तालाब, एनीकेट और सार्वजनिक मार्ग को पुरानी स्थिति में लाया जाए।
- पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति: पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन कर कंपनी से वसूली हो।
प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति
ज्ञापन सौंपने के दौरान विधायक चातुरी नंद के साथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सरायपाली ग्रामीण अध्यक्ष तेजराम पटेल, टेकचंद चौधरी, घासी राम चौहान, महेश भोई, किशोर मेहर, जुगल किशोर भोई, कैलाश चौधरी, बेनुधर पटेल, उज्जवल भोई, भीष्म देव भोई सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।