डाॅग ब्रीडिंग सेंटर और पैट शाॅप के लिए भी कराना होगा पंजीयन

उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं में करना होगा आवेदन

राजकुमार मल

भाटापारा- डॉग ब्रीडिंग सेंटर और पैट शॉप अब नहीं बेच पाएंगे प्रतिबंधित नस्ल के पशु- पक्षी। करवाना होगा संस्थान का रजिस्ट्रेशन। औचक जांच में यह अनिवार्यता नहीं मिली, तो नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड पालतू पशु- पक्षी विक्रेता संस्थानों और डॉग ब्रीडिंग सेंटरों के संचालन के तौर- तरीकों को लेकर न केवल नाराज है बल्कि औचक जांच की भी ठान ली है। इसकी पहली कड़ी में बोर्ड ने ऐसे सभी संस्थानों और सेंटरों का अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन करवाने का फरमान जारी कर दिया है। रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं के जिला मुख्यालय में किए जा सकेंगे।


इसलिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन

पशु-पक्षी पालकों की शिकायतों के बाद अपने स्तर पर छत्तीसगढ़ राज्य जीव- जंतु कल्याण बोर्ड ने पैट शॉप और डॉग ब्रीडिंग सेंटरों की जांच करवाई थी। इसमें प्रतिबंधित नस्ल के पशु- पक्षियों के विक्रय किए जाने की शिकायतें मिलीं। साथ ही क्रय- विक्रय की जानकारी लिखित में नहीं रखने जैसी बातें भी सामने आई। गंभीर थी यह शिकायतें क्योंकि पशु गणना में सही आंकड़े सामने नहीं आ पाते। डाॅग ब्रीडिंग सेंटरों में स्वच्छता को लेकर खासी लापरवाही बरती जा रही है।


60 दिवस के पूर्व रजिस्ट्रेशन

छत्तीसगढ़ राज्य जीव- जन्तु कल्याण बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पशु प्रजनन और विपणन नियम-2017 एवं पालतू पशु दुकान नियम- 2018 के तहत पालतू पशु दुकान और डॉग ब्रीडिंग सेंटरों को संचालन के 60 दिन के भीतर संस्थान या केंद्र का रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। जांच में अपंजीकृत संस्थानों को 5 दिन का अल्टीमेटम दिया जाएगा। दूसरी जांच में यह अनिवार्यता नहीं मिलने की स्थिति में संबंधित संस्थान सील कर दिया जाएगा।


इन्हें करवाना होगा रजिस्ट्रेशन

पालतू पशुओं में श्वान, बिल्ली, चूहा, खरगोश, गिनी पिग और हैमस्टर लिए गए हैं, तो पक्षियों में पिंजरे में रखे जाने वाले तोता के अलावा विदेशी नस्ल की रंग बिरंगी चिड़िया विक्रेता संस्थानों और डॉग ब्रीडिंग सेंटरों को छत्तीसगढ़ राज्य जीव- जंतु कल्याण बोर्ड से रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।

रुकेगी धोखाधड़ी

रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता के बाद प्रतिबंधित नस्ल के पशु-पक्षियों के विपणन और विक्रय पर रोक लगेगी। बड़ा लाभ यह होगा कि पशु गणना में सटीक आंकड़े सामने आएंगे।

  • डॉ एस एन अग्रवाल, अतिरिक्त उप संचालक, पशु चिकित्सालय, भाटापारा

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