CM Mohan Yadav Big Update : मध्य प्रदेश में आज लागू होंगी दो बड़ी नीतियां, जानें किसे मिलेगा सबसे बड़ा फायदा?

CM Mohan Yadav Big Update : मध्य प्रदेश में आज लागू होंगी दो बड़ी नीतियां, जानें किसे मिलेगा सबसे बड़ा फायदा?

भोपाल, 15 जनवरी 2026

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी आज दो बड़े बदलावों की गवाह बनने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026’ का आगाज करेंगे, जहाँ प्रदेश को तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाने का खाका तैयार किया जाएगा। साथ ही, राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। सरकार जल्द ही बहुप्रतीक्षित कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने जा रही है, जिससे अब इलाज के लिए जेब से पैसे देने की जरूरत नहीं होगी।

एआई कांफ्रेंस और स्पेसटेक नीति की लॉन्चिंग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इस खास कांफ्रेंस की थीम ‘एआई-एनेबल्ड गवर्नेंस फॉर एन एम्पावर्ड इंडिया’ रखी गई है। मुख्यमंत्री इस दौरान मध्य प्रदेश का ‘एआई रणनीतिक रोडमैप’ पेश करेंगे। कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण ‘मध्य प्रदेश स्पेसटेक नीति-2026’ की लॉन्चिंग होगी। यह नीति सैटेलाइट निर्माण और स्पेस डेटा एनालिसिस जैसे क्षेत्रों में युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए नए रास्ते खोलेगी। साथ ही, इनोवेशन एक्सपो में स्टार्टअप्स और हैकाथॉन के जरिए नई प्रतिभाओं को अपनी तकनीक दिखाने का मौका मिलेगा।

कर्मचारियों के लिए 10 लाख तक का मुफ्त इलाज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ‘मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना’ को अंतिम रूप दे रही है। यह योजना पूरी तरह कैशलेस होगी, यानी कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती होने पर बिल का भुगतान नहीं करना होगा। आयुष्मान भारत की तर्ज पर तैयार इस स्कीम में सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपये तक का सुरक्षा कवच मिलेगा। खास बात यह है कि इसमें दवाइयों और ओपीडी के लिए भी सालाना 10 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है।

किसे मिलेगा योजना का फायदा? इस योजना से प्रदेश के करीब 15 लाख लोग लाभान्वित होंगे। इसमें नियमित सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के अलावा संविदा कर्मी, शिक्षक, पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और कोटवारों को भी शामिल करने की तैयारी है। अभी तक कर्मचारियों को इलाज का पैसा खुद भरना पड़ता था और बाद में रीइंबर्समेंट के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन नई व्यवस्था से निजी और सरकारी अस्पतालों में सीधे इलाज मिल सकेगा। फिलहाल कर्मचारी संगठनों से सुझाव लिए जा रहे हैं ताकि योजना को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा सके।

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