चारामा : चारामा विकासखंड के सरपंच संघ और पंचों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर जिला कलेक्टर से मिलने मंगलवार को कांकेर पहुंचे, जहाँ कलेक्टर के अनुपस्थित रहने पर चारामा सरपंच संघ ने अपनी समस्याओ को लेकर मीडिया के माध्यम से प्रेस वार्ता की। सरपंच संघ ने बताया कि पिछले लगभग एक वर्ष से ग्राम पंचायतों में कोई भी विकास कार्य नहीं हो पा रहा है। पंचायतों में केवल जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने का काम रह गया है, जबकि शासन की अधिकांश योजनाएं पूरी तरह ठप पड़ी हुई हैं।
चारामा सरपंच संघ का कहना है कि चारामा ब्लाक की 64 पंचायतों को मिलने वाली डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) की राशि बंद कर दी गई है, जिससे गांवों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं मनरेगा के तहत रोजगार कार्य भी शुरू नहीं हो पा रहे हैं और 15वें वित्त आयोग की राशि भी समय पर जारी नहीं की जा रही है।
प्रेस वार्ता के दौरान चारामा सरपंच संघ ने कलेक्टर की अनुपस्थिति पर नाराज़गी जताई। संघ का आरोप है कि जब भी सरपंच अपनी समस्याएं लेकर कलेक्टर से मिलने पहुंचते हैं, तो या तो उन्हें दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है या फिर कलेक्टर अनुपस्थित रहते हैं। मंगलवार को जनदर्शन नहीं होने पर भी किसी प्रकार की सूचना जारी नहीं की गई, जिससे सरपंचों में आक्रोश बढ़ गया।
चारामा जनपद पंचायत सरपंच संघ ब्लाक चारामा के उपाध्यक्ष जय प्रकाश गावड़े ने बताया कि आज पूरे चारामा ब्लाक की 64 पंचायतों के सरपंच अपनी छोटी-बड़ी मांगों को लेकर कलेक्टर से मिलने पहुंचे थे, लेकिन कलेक्टर उपस्थित नहीं थे। उन्होंने कहा कि पहले हर मंगलवार को जनदर्शन लगाया जाता था, लेकिन आज जनदर्शन नहीं होने की कोई सूचना भी नहीं दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले एक वर्ष से पंचायतों में कोई विकास कार्य नहीं हो रहा है। 15वें वित्त आयोग की राशि नहीं मिल रही है और न ही डीएमएफ की राशि दी जा रही है। सरकार का कहना है कि जहां खदानें हैं, वहां डीएमएफ की राशि नहीं मिलेगी, लेकिन चारामा ब्लाक के ग्राम अरौद में डीएमएफ राशि दी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह दोहरा व्यवहार क्यों किया जा रहा है। जय प्रकाश गावड़े ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नहीं सुना गया, तो वे मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
अध्यक्ष मैना ध्रुव ने आरोप लगाते हुए कहा कि वे पहले भी अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर के पास गए थे, लेकिन उन्हें केवल दुर्व्यवहार ही मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरपंच अपनी समस्याएं लेकर किसके पास जाएं। उन्होंने कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा।
पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र सलाम ने चिंता जताते हुए कहा की कि एक साल से पंचायतों में कोई काम नहीं हुआ है। गांवों का विकास पूरी तरह ठप हो चुका है और स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। उन्होंने कहा कि खदान वाले पंचायतों को न तो खदान की राशि मिल रही है और न ही डीएमएफ की राशि दी जा रही है।
सरपंच संघ ने साफ कहा है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।