1 अप्रैल से बदल जाएगी आपकी टैक्स की दुनिया, पुराने कानूनों की छुट्टी और नियमों में बड़ी राहत

Income Tax Act 2025

नई दिल्ली। देश की कर प्रणाली (Tax System) में 1 अप्रैल से एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार करीब छह दशक पुराने ‘इनकम टैक्स एक्ट 1961’ को विदाई देने की पूरी तैयारी कर चुकी है। इसकी जगह अब ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ प्रभावी होगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य टैक्स की जटिलताओं को खत्म कर इसे आम आदमी की समझ के दायरे में लाना है। राहत की बात यह है कि इस बदलाव से आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा, क्योंकि टैक्स की दरें पुरानी ही रहेंगी।

50 फीसदी छोटा और आसान होगा नया कानून
मौजूदा इनकम टैक्स कानून साल 1961 का है, जिसमें समय-समय पर इतने संशोधन हुए कि वह टैक्सपेयर्स के लिए एक अबूझ पहेली बन गया। जानकारों का कहना है कि नया कानून पुराने के मुकाबले लगभग 50 प्रतिशत छोटा होगा। इसमें इस्तेमाल की गई कानूनी भाषा को बेहद सरल रखा गया है ताकि नौकरीपेशा लोग और सीनियर सिटीजन्स बिना किसी टैक्स एक्सपर्ट की मदद के खुद अपने कर दायित्वों को समझ सकें। अनावश्यक सेक्शन और पुराने पड़ चुके प्रावधानों को इस नए एक्ट से पूरी तरह हटा दिया गया है।

असेसमेंट ईयर का झंझट खत्म, अब होगा सिर्फ ‘टैक्स ईयर’
अब तक करदाताओं को ‘प्रीवियस ईयर’ (Previous Year) और ‘असेसमेंट ईयर’ (Assessment Year) जैसे तकनीकी शब्दों के कारण आईटीआर भरने में काफी उलझन होती थी। नए एक्ट में इस भ्रम को जड़ से खत्म कर दिया गया है। अब केवल ‘टैक्स ईयर’ शब्द का इस्तेमाल होगा। इससे कर निर्धारण की प्रक्रिया सरल होगी। इसके अलावा, टीडीएस (TDS) रिफंड को लेकर भी नियमों को सुधारा गया है, जिससे तय तारीख के बाद भी रिटर्न फाइल करने पर रिफंड पाना आसान हो जाएगा।

टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं, विवादों पर लगेगी लगाम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नया कानून ‘रेवेन्यू न्यूट्रल’ है। इसका मतलब है कि न तो सरकार अपनी कमाई बढ़ा रही है और न ही टैक्स स्लैब में फिलहाल कोई बदलाव किया गया है। बदलाव सिर्फ प्रक्रिया और नियमों के सरलीकरण में है। सरकार को उम्मीद है कि नियमों के स्पष्ट होने से टैक्स को लेकर होने वाली मुकदमेबाजी और अदालती मामलों में भारी कमी आएगी।

बजट 2026-27 के लिए बनेगा मजबूत आधार
आने वाले बजट 2026-27 में पर्सनल टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स या एचयूएफ (HUF) से जुड़े जो भी नए प्रस्ताव आएंगे, वे इसी ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ के ढांचे के भीतर शामिल किए जाएंगे। संसद की मंजूरी और राष्ट्रपति की मुहर के बाद अब विभाग नए टैक्स फॉर्म और गाइडलाइंस तैयार करने में जुटा है। 2010 और 2017 की कोशिशों के बाद अब जाकर देश को एक ऐसा आधुनिक टैक्स कानून मिलने जा रहा है जो डिजिटल युग की जरूरतों के अनुरूप है।

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