भानुप्रतापपुर। नगर में पहली बार श्रीमद देवी भगवती कथा पंडित देवव्रत शास्त्री भागवताचार्य एवं ज्योतिषाचार्य नगरी सिहावा के श्रीमुख से किया जा रहा है। देवी भागवत कथा के रसपान करने महिलाओं की भारी भीड़ कथा स्थल पर मौजूद रही। कथा के चौथे दिवस मंगलवार को शिव-पार्वती मंगल, चराचर जगत पर दिव्यशक्ति की कृपा के साथ ही महालक्ष्मी, महाकाली एवं महासरस्वती की मनमोहक झांकी निकाली गई।
कथा श्रवण से रोग और शोक का नाश
कथावाचक ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में बताया कि मानव जीवन के कई जन्मों के बाद ही देवी भागवत सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। देवी भागवत वह चमत्कारी कथा है जिससे रोग ही नहीं शोक भी समाप्त हो जाता है। जीवन में केवल सुख की अनुभूति मिलती है।

उन्होंने कहा कि संसार में इतने काम पड़े हैं कि मानव परमात्मा को भूल जाता है। बेटा एक कुल तो बेटी दोनों कुल को तारती है। धन्य है मां जिसने बेटी को जन्म दिया है। जीवन बहुत छोटी है फिर भी लोग संतों के संगत पर नहीं मोबाइल को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। कथा श्रवण मात्र से ही जीवन का उद्धार हो जाता है। समाज के हित के लिए मैं समय पड़े तो अपने आप को बेच सकता हूँ।
आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति
भव्य देवी भागवत महापुराण कथा ने क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना की नई लहर पैदा कर दी है। आज भी समाज अपने जीवन में शांति, स्वास्थ्य और सफलता के लिए सनातन संस्कृति की ओर लौट रहा है। उन्होंने बताया कि महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित 18 पुराणों में देवी भागवत महापुराण को विशेष स्थान प्राप्त है। यह कथा मां भगवती परम्बा शक्ति महामाया के दिव्य चरित्र, लीलाओं और उनके कृपा प्रभावों का अनुपम वर्णन करती है। उन्होंने कहा कि यह कथा जीवन के परम लक्ष्य, आत्म-ज्ञान और आनंद की प्राप्ति का सशक्त माध्यम है।

स्वास्थ्य, सुख और पितृ-कल्याण का महापुराण
कथा के दौरान वक्ता ने बताया कि देवी भागवत कथा का श्रवण करने से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य सुदृढ़ होता है, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पितरों को सद्गति प्राप्त होती है। पितृ दोष से पीड़ित परिवारों को इससे विशेष लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि यह कथा कई पीढ़ियों को तारने वाली तथा जीवन की विपत्तियों से उबारने वाली मानी गई है। इस संदेश ने जनसमूह में श्रद्धा और विश्वास को और प्रबल किया।
समाज निर्माण की दिशा में प्रेरक पहल
कथावाचक ने भानुप्रतापपुर में संचालित “बेटा बचाओ अभियान” का उल्लेख करते हुए इसे समाज को नई दिशा देने वाला अभियान बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं को सही मार्ग पर चलने और अपने जीवन को सफल बनाने के लिए प्रेरित कर रही है। जब व्यक्ति अपने भीतर की शक्ति को पहचान लेता है, तब उसे जीवन का सच्चा आनंद, शांति और संतोष प्राप्त होता है।

देवी भागवत कथा न केवल एक धार्मिक आयोजन बनकर उभरी, बल्कि यह समाज में सकारात्मक परिवर्तन, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक जागरण का सशक्त माध्यम भी सिद्ध हो रही है।