Global Electronics Hub : नई दिल्ली : भारत को दुनिया की ‘इलेक्ट्रॉनिक फैक्ट्री’ बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 22 नई परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी गई है, जो न केवल भारत की तकनीक की दुनिया में साख बढ़ाएंगी, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी नई गति देंगी।
Global Electronics Hub : इस महा-योजना के जरिए देश में 41,863 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश आने वाला है। सबसे राहत की खबर उन युवाओं के लिए है जो रोजगार की तलाश में हैं, क्योंकि इन प्रोजेक्ट्स से 33,791 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। सरकार का लक्ष्य अब केवल विदेशों से आने वाले सामान को जोड़ना (Assembly) नहीं, बल्कि मोबाइल और लैपटॉप के मुख्य पुर्जे भारत में ही तैयार करना है।
यह औद्योगिक क्रांति देश के 8 राज्यों—आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान—में फैलेगी। विशेष रूप से एप्पल (Apple) की सप्लाई चेन से जुड़े वेंडर्स और फॉक्सकॉन, सैमसंग, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी दिग्गज कंपनियां इस निवेश का नेतृत्व कर रही हैं। अकेले तमिलनाडु में फॉक्सकॉन के एक प्रोजेक्ट से 16 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मुख्य फोकस स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक वाहनों के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों जैसे लिथियम-आयन बैटरी सेल, कैमरा मॉड्यूल, और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) के उत्पादन पर है। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, यह कदम भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बना देगा, जिससे आने वाले समय में ‘मेड इन इंडिया’ चिप और कंपोनेंट्स पूरी दुनिया के गैजेट्स में दिखाई देंगे।