भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित प्रबुद्धजन गोष्ठी और युवा संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने हिंदुत्व को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हिंदू कोई जाति नहीं है, बल्कि यह समाज का स्वभाव और साझा सोच है। हिंदू नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें सभी पंथों और संप्रदायों को स्वीकार करने और उनका सम्मान करने की भावना निहित है।
डॉ. भागवत ने कहा कि हिंदू, हिंदवी और भारत—ये तीनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। हिंदू शब्द हमें एक सूत्र में बांधता है। यह केवल धर्म की परिभाषा नहीं, बल्कि भारत की मूल प्रकृति है। संघ का विचार कोई नया नहीं है, बल्कि यह सनातन काल से चला आ रहा है और आज भी उतना ही प्रासंगिक है।


उन्होंने कहा कि भाजपा को देखकर संघ को समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। भाजपा, विश्व हिंदू परिषद और विद्या भारती के कार्य करने के तरीके अलग हैं, जबकि संघ समाज सुधार के लिए कार्य करता है और ऐसे स्वयंसेवक तैयार करता है जो समर्पण भाव से समाज की गुणवत्ता सुधारने में लगे रहते हैं।
संघ प्रमुख ने कहा कि कमजोर व्यक्ति की बात, चाहे वह सत्य ही क्यों न हो, अक्सर अनसुनी रह जाती है, जबकि शक्तिशाली की बात सही-गलत देखे बिना स्वीकार कर ली जाती है। आज दुनिया भारत से एक नए मार्ग की उम्मीद कर रही है, ऐसे में भारतीय युवाओं को सशक्त बनना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि शरीर, मन और बुद्धि की मजबूती आवश्यक है, लेकिन अभी वैसी स्थिति पूरी तरह नहीं बन पाई है। जब भारत सशक्त बनता है तो वह विश्व को नई दिशा दिखाता है। संघ का उद्देश्य भी यही है कि संगठित सामाजिक शक्ति के माध्यम से धर्म का संरक्षण करते हुए देश को परम वैभव की ओर ले जाया जाए।