Paush Purnima : प्रयागराज | 3 जनवरी, 2026 : आज 3 जनवरी को आस्था का महापर्व पौष पूर्णिमा मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, यह दिन साल की सबसे महत्वपूर्ण पूर्णिमा तिथियों में से एक है क्योंकि यह तपस्या के महीने ‘माघ’ की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक है। आज सुबह से ही गंगा, यमुना और सरयू के घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा है। ज्योतिषियों का मानना है कि इस बार पौष पूर्णिमा पर शनिवार का योग और अमृत काल का विशेष संयोग बन रहा है, जो इसे आध्यात्मिक साधना और पितृ दोष से मुक्ति के लिए अत्यंत फलदायी बना रहा है।
Paush Purnima : उदयातिथि का महत्व: दोपहर 3:32 तक है पुण्य काल
हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि आज शनिवार को दोपहर 03 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। सनातन धर्म में उदयातिथि का विशेष महत्व होने के कारण, आज पूरे दिन स्नान-दान और व्रत की क्रियाएं संपन्न की जा सकेंगी। जो भक्त संगम की रेती पर कल्पवास शुरू कर रहे हैं, उनके लिए आज का दिन संकल्प लेने का है। आज किया गया ‘सत्यनारायण व्रत’ न केवल परिवार में शांति लाता है, बल्कि आर्थिक तंगहाली को भी दूर करने में सहायक माना जाता है।
माघ स्नान की महिमा: क्यों खास है आज की डुबकी?
पौष पूर्णिमा से ही सूर्य और चंद्रमा का वह विशेष संरेखण शुरू होता है, जिसमें जल तत्व में औषधीय और आध्यात्मिक गुण समाहित हो जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, आज के दिन से लेकर पूरे माघ महीने तक प्रयागराज संगम में सभी तीर्थों का वास होता है। यदि आप पवित्र नदी तक नहीं जा सकते, तो घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का जाप करते हुए स्नान करें, इससे भी आपको तीर्थ स्नान के समान पुण्य प्राप्त होगा।
दान की महिमा: इन 5 वस्तुओं का दान है महाफलदायी
आज के दिन दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। चूँकि आज शनिवार का दिन भी है, इसलिए शनि देव और भगवान विष्णु दोनों की कृपा पाने का यह अद्भुत अवसर है। आज जरूरतमंदों को काला तिल, गुड़, कंबल, ऊनी वस्त्र और सात प्रकार के अनाज (सप्तधान्य) का दान जरूर करें। ऐसा करने से कुंडली के अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है और घर में लक्ष्मी का स्थाई निवास होता है। साथ ही शाम को चंद्रमा को दूध मिश्रित अर्घ्य देने से मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।