हिंदी की प्रसिद्ध उपन्यासकार राजी सेठ ने दुनिया को अलविदा कह दिया. हिंदी साहित्य में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनके प्रमुख कार्यों में उपन्यास ‘तत-सम’ और ‘निष्कवच’, तथा कई कहानी संग्रह शामिल हैं। उन्हें भारतीय भाषा परिषद पुरस्कार, हिंदी अकादमी सम्मान और अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक छा गया । अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच ने उनको विनम्र श्रद्धांजलि दी है ।

राजी सेठ का जन्म सन् 1935 में नौशेहरा छावनी, पाकिस्तान (अविभाजित भारत) में हुआ। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. और ‘तुलनात्मक धर्म और भारतीय दर्शन’ विषय पर विशेष अध्ययन किया। 1974-75 से लेखन की शुरुआत की। उपन्यास, कहानी, कविता, निबन्ध आदि सभी विधाओं में लिखा। अनुवाद कार्य भी किए।
उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—तत-सम (उपन्यास); निष्कवच (दो उपन्यासिकाएँ); अन्धे मोड़ से आगे, तीसरी हथेली, यात्रा-मुक्त, दूसरे देशकाल में, सदियों से, यह कहानी नहीं, किसका इतिहास, गमे हयात ने मारा, ख़ाली लिफ़ाफ़ा, मार्था का देश, बाहरी लोग (कहानी-संग्रह); पगडंडियों पर पाँव (साक्षात्कार); जहाँ से उजास (संस्मरण)।
अंग्रेज़ी और विभिन्न भारतीय भाषाओं में उनकी पुस्तकों के अनुवाद हुए हैं। उन्होंने जर्मन कवि रिल्के के 100 पत्रों का अनुवाद किया है। ऑक्टावियो पाज़, दायसाकू इकेदा, लक्ष्मी कण्णन आदि लेखकों की रचनाओं के भी अनुवाद किए हैं।

उन्हें ‘हिन्दी अकादमी सम्मान’, ‘भारतीय भाषा परिषद पुरस्कार’, ‘अनन्त गोपाल शेवड़े पुरस्कार’, ‘वाग्मणि सम्मान’, ‘संसद साहित्य परिषद सम्मान’, ‘जनपद अलंकरण’, ‘टैगोर लिटरेचर अवार्ड’, ‘शिरोमणि सम्मान’ समेत कई पुरस्कारों से पुरस्कृत किया गया है।
छत्तीसगढ़ फ़िल्म एंड विज़ुअल आर्ट सोसाइटी ने भी राजी सेठ को श्रद्धांजलि अर्पित की है. बता दें छत्तीसगढ़ फिल्म एंड विजुअल आर्ट सोसायटी ने “जितने लव उतने अफसाने’ नाटक का मंचन भी किया था। रचना मिश्रा के निर्देशन में नाट्य प्रस्तुति की गई थी।