मां बम्लेश्वरी मंदिर पूजा विवाद गहराया: ट्रस्ट का मौन जुलूस, गर्भगृह प्रवेश पर आपत्ति — गोंड समाज ने दी तीखी प्रतिक्रिया

डोंगरगढ़, 16 अक्टूबर 2025। नवरात्र के दौरान मां बम्लेश्वरी मंदिर में पूजा पद्धति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और तीव्र हो गया है। मंदिर ट्रस्ट समिति ने सर्व हिंदू समाज के साथ मिलकर सोमवार को मौन जुलूस निकालते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ट्रस्ट ने गर्भगृह में प्रवेश और पूजा पद्धति में हस्तक्षेप का विरोध किया।

मौन जुलूस में मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी, दुकानदार, कर्मचारी और सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने कहा कि डोंगरगढ़ सदैव धार्मिक एकता का प्रतीक रहा है, लेकिन हाल की घटनाओं से मंदिर की मर्यादा को ठेस पहुंची है। उन्होंने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा, “हम सभी श्रद्धालुओं का सम्मान करते हैं, लेकिन परंपराओं और मर्यादाओं का पालन जरूरी है।”

वहीं, गोंड समाज ने ट्रस्ट पर आरोप लगाया कि वह इस मामले को “हिंदू बनाम आदिवासी” के रूप में पेश कर समाज में विभाजन की कोशिश कर रहा है। गोंड समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे केवल अपने रियासतकालीन पारंपरिक पूजन का पालन कर रहे थे। “दाई बमलाई की पूजा हमारी परंपरा का हिस्सा है, इसे किसी तरह की बलि समझना गलत है,” उन्होंने कहा।

विवाद की जड़ उस घटना से जुड़ी है जब राजकुमार भवानी बहादुर सिंह, जो खैरागढ़ राजघराने के वंशज हैं, अपने अनुयायियों के साथ नवरात्र की पंचमी पर “गढ़ माता” की पारंपरिक पूजा कर रहे थे। कुछ लोगों ने इसे पशु बलि समझ लिया और प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। बाद में जांच में बलि की पुष्टि नहीं हुई।

राजकुमार भवानी बहादुर सिंह ने स्पष्ट किया कि वे केवल बैगा परंपरा के अनुसार पूजा कर रहे थे। “मंदिर ट्रस्ट को संचालन का अधिकार है, मालिकाना हक नहीं,” उन्होंने कहा।

इस बीच, एसडीएम एम. भार्गव ने बताया कि दोनों पक्षों के ज्ञापन प्राप्त हुए हैं और प्रशासन बातचीत से समाधान निकालने की कोशिश करेगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि डोंगरगढ़ जैसी शांत धार्मिक नगरी में इस विवाद को बढ़ाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और आस्था की एकता बनाए रखने की अपील की।

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