बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अब अदालतों से जुड़े नोटिस और दस्तावेजों को भेजने के लिए स्पीड पोस्ट का प्रयोग किया जाएगा। इस फैसले के बाद नोटिस और अन्य दस्तावेजों की डिलीवरी प्रक्रिया न केवल तेज होगी, बल्कि न्यायिक कार्यवाही में अनावश्यक विलंब की संभावनाएं भी समाप्त होंगी।

क्या होगा बदलाव?
पहले कोर्ट से जुड़े नोटिस और दस्तावेजों की डिलीवरी में कई बार देरी होती थी। कई मामलों में अधिकारियों और पक्षकारों द्वारा देरी के बहाने पेश किए जाते थे, जिससे मामलों के निपटारे में समय लग जाता था। हाईकोर्ट के इस नए फैसले के बाद अब इस प्रकार की बहानेबाजी पर अंकुश लगेगा। दस्तावेज समय पर संबंधित पक्षों तक पहुंचेंगे और न्यायिक प्रक्रिया गति पकड़ेगी।
जवाबदेही तय होगी
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अब देरी का हवाला देकर मामले को टालना संभव नहीं होगा। यदि समय पर नोटिस प्राप्त होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती है, तो संबंधित अधिकारी या पक्षकार पर जवाबदेही तय की जाएगी। यह फैसला न्यायिक व्यवस्था में अनुशासन और जिम्मेदारी बढ़ाने का काम करेगा।
क्यों है यह फैसला अहम?
छत्तीसगढ़ में कई मामलों में नोटिसों की डिलीवरी और दस्तावेज पहुंचने में देरी के कारण सुनवाई लंबित होती रही है। ऐसे में हाईकोर्ट का यह निर्णय राज्य की न्यायिक प्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तेज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस फैसले को लेकर अधिवक्ताओं और आम जनता के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोगों का मानना है कि इससे न केवल मामलों के निपटारे की गति बढ़ेगी, बल्कि न्याय दिलाने की प्रक्रिया भी समयबद्ध होगी।