:सुजाता साहा:
नवजात के लिए मां का दूध पालन-पोषण का एक मात्र जरिया है। इसमें कई तरह के विटामिन, चीनी, प्रोटीन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। मां के दूध से शिशु को पूरा पोषण मिलता है और कई बीमारियों से लड़ने की ताकत भी देता है। जन्म के एक घंटे के अंदर मां का गाढ़ा दूध शिशु का पहला टीका होता है, लेकिन खराब खानपान से शिशु को बीमार कर रहा है यह पहला आहार। एक प्रतिष्ठित अखबार ने राजस्थान में रिसर्च व शोध कराया जिसमें यह बात सामने आई है कि मां के दूध के जरिए ही कई बीमारियां नवजात को अपना शिकार बना रही है।

अखबार ने 26 से 42 आयु की 105 स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध की जांच कराई। सभी टेस्ट जयपुर, बीकानेर व अलवर के एनएचीएल अफूट सेंटर पर कराए गए है। टेस्ट में आया कि खाने की बाली से लेकर पानी, फल, हरी सब्जी से जो कुछ मां के शरीर में पहुंच रहा है। वही शिशु को दूध के जरिए मिल रहा है। इस जांच मेंं 97% मांओं के दूध में कीटनाशक मिला। डिटर्जेंट व यूरिया भी। अमोनियम, सत्लेट व फॉर्मेलिन माल्टोडेक्सट्रिन जैसे हानिकारक रसायन भी मिले। अलवर गवर्नमेंट कॉलेज के प्रागी विज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. ममता शर्मा का कहना है मिलावटी और खराब खान-पान, खेती में पेस्टीसाइड्स के अनियंत्रित उपयोग और लाइफस्टाइल की वजह से यह स्थिति बनी है।
अभी दो दिन पहले ही मैंने फेसबुक में एलिस ओगलेट्री के बारे में पढ़ा था, उन्होंने जुलाई 2023 तक लगभग 2600 लीटर से अधिक स्तन दूध दान करके रिकॉर्ड बनाया था। मदर्स मिल्क बैंक के मुताबिक, एक लीटर स्तन दूध से 11 प्रीमैच्योर शिशुओं की पोषण मिल सकता है।
इस हिसाब से एलिसा ने 2600 लीटर से अधिक दूध दान करके 350,000 से ज्यादा बच्चों की जान बचाई और पोषण पहुंचाया। 36 वर्षीय एलिस ओगलेट्री अमेरिका के टेक्सास में रहती हैं, उन्होंने अपना खुद का दूध दान करके विश्व रिकॉर्ड बनाया है।

गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड के मुताबिक उन्होंंने 2025 तक 2,645.58 लीटर दूध दान किया है। वह तीन बच्चों की मां हैं और उनका यह दान लगभग 3.5 लाख नवजात बच्चों की जिंदगी बचाने में मददगार साबित हुआ। साल 2014 में भी ओगलेट्री यह कीर्तिमान बना चुकी हैं। तब उन्होंने 1,569.79 लीटर दूध का दान किया था।
कई माताओं को पूरक आहार न मिल पाने या स्वास्थ्य समस्याओं के कारण दूध नहीं आता, जिससे वह बच्चे को पोषण नहीं दे पातीं। ऐसे बच्चे जिन्हें परिवार गोद लेते हैं, वह भी फार्मूला के बजाय स्तन का दूध देना पसंद करते हैं।
हालांकि ऐसी स्थितियों में शिशु में मां के दूध की पूर्ति के लिए स्तन दूध बैंक है, जहां महिलाएं मां का दूध दान करती हैं।
भारत में ब्रेस्ट मिल्क दान करने को लेकर नियम बनाए गए हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने ब्रेस्ट मिल्क दान को सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए डोनर महिलाओं के लिए कुछ स्वास्थ्य परीक्षण लागू किए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका दूध शिशु के लिए सुरक्षित है।
स्वास्थ्य परीक्षण के अंतर्गत एचआईवी, हेपेटाइटिस, और अन्य संक्रामक बीमारियों की जांच की जाती है। मिल्क डोनेशन के लिए डोनर की उम्र 21 से 35 साल के बीच निर्धारित की गई है। इसके अलावा महिला को पूरी तरह से स्वस्थ जरूरी है, यदि महिला किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है या गर्भवती है, तो वह दूध दान नहीं कर सकती।