पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से आसमान छू रहे हैं। इस संकट की वजह से पेट्रोल, डीजल और अन्य घरेलू ईंधनों की कीमतें भी लगातार महंगी होती जा रही हैं। इस वैश्विक मुसीबत के बीच भारत ने तेल के एक बेहद शानदार और देसी विकल्प पर काम करना शुरू कर दिया है। गुजरात के बनासकांठा जिले में अब पशुओं के गोबर से गाड़ियों को चलाने वाला अनोखा ईंधन तैयार किया जा रहा है। यह नया ईंधन पेट्रोल के मुकाबले न सिर्फ बहुत ज्यादा सुरक्षित है बल्कि जेब के लिए काफी किफायती भी है। इस बड़े बदलाव के बाद देश में renewable bio compressed gas solutions को लेकर एक नई उम्मीद जाग गई है।
गुजरात में सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन और प्रसिद्ध बनास डेयरी ने मिलकर एक बहुत बड़ा प्रयोग किया है। इन दोनों संस्थाओं ने मिलकर एक विशेष बायो-सीएनजी स्टेशन की शुरुआत की है। यह पंप हर दिन लगभग 600 से 700 छोटे-बड़े वाहनों को गोबर से तैयार की गई गैस की सप्लाई कर रहा है। जब दुनिया भर में तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, तब भारत का यह छोटा सा दिखने वाला कदम देश को महंगे विदेशी तेल के आयात से पूरी तरह आजादी दिला सकता है।
किसानों को मिल रहा है सीधा फायदा
एक प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार यह नया स्टेशन पशुओं के गोबर से निकलने वाली मीथेन गैस को रिफाइन करके जैविक प्राकृतिक गैस बेचता है। इस ईंधन की कीमत बाजार में केवल 80 रुपये प्रति किलोग्राम रखी गई है। यह कीमत देश के कई बड़े शहरों में मिलने वाले पेट्रोल के भाव से 20 रुपये से भी ज्यादा सस्ती है। इस पूरे प्लांट को सुचारू रूप से चलाने के लिए आस-पास के 16 गांवों से हर दिन करीब 88 टन ताजा गोबर इकट्ठा किया जाता है।
इस काम के लिए प्लांट प्रबंधन ग्रामीण इलाकों के किसानों को 1 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से नकद भुगतान भी करता है। इस नई व्यवस्था के कारण अब गांव के गरीब पशुपालकों और किसानों को खेती के साथ-साथ कमाई का एक नया और अतिरिक्त जरिया मिल गया है। इस कचरे से कंचन बनाने वाली तकनीक की सफलता को देखते हुए अब देश के अन्य राज्यों में भी ऐसे प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है।