महंगे किराये के बाद भी इस ट्रेन में मची भारी लूट, टिकट मिलना हुआ नामुमकिन

भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यही कारण है कि अब अधिकांश रूट की ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलना कठिन होता है। मेल एक्सप्रेस के साथ ही अब वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों में भी यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। लोग अधिक किराया देने के बावजूद इन ट्रेनों में सफर को प्राथमिकता दे रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के दौरान उत्तर रेलवे की वंदे भारत ट्रेनों में 1,47,462 यात्रियों ने सफर किया। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या मात्र 80,394 थी। इस प्रकार यात्री संख्या में 83 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। इसका सकारात्मक असर रेलवे की आय पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

कमाई में 72 प्रतिशत का बडा इजाफा

वंदे भारत ट्रेनों से प्राप्त आय पिछले वर्ष 7.67 करोड़ रुपये थी। अब यह बढ़कर 13.21 करोड़ रुपये हो गई है। यह कुल 72 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। इसके अलावा ट्रेनों के शुरुआती स्टेशन से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा 11.43 करोड़ से बढ़कर 12.07 करोड़ तक पहुंच गया है।

प्रारंभिक यात्री आय 3,083.42 करोड़ से बढ़कर 3,567.59 करोड़ रुपये हो गई है। यह रेलवे के राजस्व में 15.7 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने इस कामयाबी का श्रेय रेलवे की टीम को दिया है।

बेहतर रणनीति और भविष्य की राह

हिमांशु शेखर उपाध्याय के अनुसार, इन उपलब्धियों के पीछे केंद्रित परिचालन रणनीति का हाथ है। इसमें संसाधनों का बेहतर उपयोग, सतत निगरानी और प्रभावी टिकट जांच शामिल है। क्षेत्रीय स्तर पर सुदृढ़ पर्यवेक्षण से भी सेवाओं में सुधार हुआ है। यही वजह है कि यात्रियों का भरोसा रेलवे के प्रति और भी मजबूत हुआ है।

उत्तर रेलवे भविष्य में भी यात्रियों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग परिचालन उत्कृष्टता बनाए रखने के साथ ही राजस्व में वृद्धि सुनिश्चित करेगा। रेलवे इसी समर्पण के साथ भविष्य में भी यात्रियों के सफर को सुखद बनाने के लिए काम करता रहेगा।

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