अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को एक बहुत बड़ा सुराग हाथ लगा है। इस मामले में अब एक अन्य संदिग्ध कर्मचारी से जुड़े अहम साक्ष्य अधिकारियों को प्राप्त हुए हैं। यह नया संदिग्ध राम मंदिर निर्माण से जुड़ी जानी-मानी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) का कर्मी बताया जा रहा है। हालांकि कंपनी के अधिकारियों ने अभी इस बात की पूरी तरह पुष्टि नहीं की है। इस खुलासे के बाद राम जन्मभूमि परिसर में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर फिर से बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
एसआईटी की जांच में सामने आया है कि बस्ती जिले का मूल निवासी महेश कुमार इस पूरे मामले में संदेहास्पद भूमिका में है। यह व्यक्ति चोरी के मुख्य आरोपी रामशंकर यादव टिन्नू के घर पर ही किराए पर रहता था। स्थानीय लोगों के मुताबिक इन दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और इन्हें अक्सर साथ में देखा जाता था। हालांकि महेश की ड्यूटी सीधे नोटों की गिनती करने वाले कक्ष में नहीं थी। वह कंपनी में केवल खातों से जुड़ा कार्य देखता था और टेलीशीट यानी पैसों के मिलान का हिसाब बनाता था। इसके बावजूद पिछले 1 साल के भीतर उसकी संपत्ति में बेहिसाब बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस चौंकाने वाले मामले के कारण अब ram mandir donation theft case की जांच का दायरा काफी बढ़ गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत, लखनऊ के आईजी जोन को सौंपे गए साक्ष्य
महेश कुमार की अचानक बढ़ी बेहिसाब संपत्तियों और उसकी संदिग्ध भूमिका को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य सक्षम अधिकारियों से लिखित शिकायत की गई है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी में शामिल सदस्य और लखनऊ के आईजी जोन किरण एस. को भी सीधे साक्ष्य भेजे गए हैं। महेश के पैतृक गांव इटवा के ही एक व्यक्ति ने आईजी के जनसंपर्क अधिकारी मुकुल प्रकाश वर्मा के पास शिकायती पत्र भेजकर जमीन की खरीद से जुड़े पक्के दस्तावेज सौंपे हैं। शिकायतकर्ता ने सुरक्षा कारणों से एसआईटी से अपना नाम पूरी तरह गुप्त रखने की अपील की है।
18 हजार की मामूली नौकरी, पर 1 महीने में खरीद डाली 90 लाख की जमीन
शिकायत पत्र में दिए गए विवरण के मुताबिक स्वयं को कंपनी का कर्मचारी बताने वाले महेश कुमार ने 12 जून को अपने बगल के गांव गढ़हाराजा में 6 बीघा जमीन करीब 90 लाख रुपये में खरीदी है। इसके अलावा पड़ोस के ही बेनीपुर गांव में 12 लाख रुपये प्रति बिस्वा की दर से दो बड़े भूखंड खरीदे गए हैं। यह सारी खरीदारी चढ़ावा चोरी का मामला उजागर होने के ठीक बाद की गई है। महेश ने यह सभी कीमती जमीनें अपने भाई रमेश कुमार, पत्नी, भाभी, बहन-बहनोई और भांजे के नाम पर रजिस्टर्ड करवाई हैं। हैरानी की बात यह है कि महेश का भाई कोई काम नहीं करता है और महेश को खुद केवल 15 से 18 हजार रुपये महीना वेतन मिलता है।
सालभर में बना डाली 20 करोड़ की संपत्ति, एसआईटी ने शुरू की पूछताछ
आरोपों के मुताबिक महेश कुमार अपने गांव में खुद को राम मंदिर ट्रस्ट का सदस्य बताता था। उसने पिछले 1 वर्ष के भीतर अयोध्या के दर्शननगर के साथ-साथ बस्ती, लखनऊ और प्रयागराज में करीब 20 अचल संपत्तियां खरीदी हैं। इन संपत्तियों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार एसआईटी के एक वरिष्ठ सदस्य ने लखनऊ कार्यालय में बुलाकर संदिग्ध से बंद कमरे में पूछताछ भी की है। दूसरी ओर एलएंडटी कंपनी के परियोजना निदेशक विनोद कुमार मेहता ने साफ कहा है कि उनके रिकॉर्ड में इस नाम और पते का कोई भी कर्मचारी तैनात नहीं रहा है। पुलिस अब इस फर्जीवाड़े की गहराई से जांच कर रही है।