रायपुर में बोले देवकीनंदन ठाकुर: “देश में बने ‘सनातन बोर्ड’, संसद और विधानसभाओं में धर्माचार्यों के लिए आरक्षित हों 50 सीटें”

रायपुर। देश के सुप्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर ने सनातन संस्कृति की रक्षा और देश में नैतिक मूल्यों की बहाली के लिए दो बड़े और साहसिक सुझाव दिए हैं। रायपुर प्रेस क्लब के चर्चित संवाद कार्यक्रम “हमर पहुना” में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने देश में ‘सनातन बोर्ड’ के गठन की पुरजोर वकालत की। इसके साथ ही उन्होंने राजनीति के शुद्धिकरण के लिए संसद और विधानसभाओं में धर्माचार्यों के लिए 50 सीटें आरक्षित करने की मांग उठाकर एक नई बहस छेड़ दी है।

प्रेस क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में देवकीनंदन ठाकुर ने लिव-इन रिलेशनशिप, धर्मांतरण, आधुनिक शिक्षा और राम मंदिर जैसे कई गंभीर समसामयिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी।

  1. ‘सनातन बोर्ड’ का गठन और मंदिरों की आय पर बड़ा बयान
    देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि वक्फ बोर्ड की तर्ज पर देश में एक सशक्त ‘सनातन बोर्ड’ बनना बेहद जरूरी है।

यह बोर्ड देश के मंदिरों, गुरुकुलों और सनातन परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन का काम करेगा।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मंदिरों से होने वाली आय का पूरा उपयोग सिर्फ और सिर्फ धर्म, गौ-संरक्षण, सनातन शिक्षा और समाज हित के कार्यों में ही होना चाहिए।

  1. संसद-विधानसभा में संतों के लिए मांगीं 50 सीटें
    सार्वजनिक जीवन और राजनीति में गिरते नैतिक स्तर पर चिंता जताते हुए उन्होंने एक अनोखा प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा:

“अगर भारत को सच में विश्वगुरु बनाना है, तो कानून बनाने वाली जगहों पर नैतिक और धार्मिक मूल्यों वाले लोगों का होना जरूरी है। इसके लिए संसद और विधानसभाओं में धर्माचार्यों के लिए 50 सीटें आरक्षित की जानी चाहिए।”

  1. लिव-इन रिलेशनशिप और धर्मांतरण पर कड़ा रुख
    लिव-इन रिलेशनशिप: उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था हमारे मजबूत पारिवारिक मूल्यों को खोखला कर रही है, जिससे समाज में अपराध और बिखराव बढ़ रहा है।

धर्मांतरण: सनातन गुरु ने विभिन्न प्रलोभनों और दबाव के माध्यम से हो रहे धर्मांतरण पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा कभी किसी पर धर्म बदलने का दबाव नहीं डालती, लेकिन सोची-समझी साजिश के तहत हो रहे धर्मांतरण को रोकना जरूरी है।

  1. “बच्चों को फिल्मी गानों के बजाय गीता-महाभारत पढ़ाएं”
    कथावाचक ने आज की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का जरिया नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का माध्यम होनी चाहिए। उन्होंने माता-पिता से अपील की:

बच्चों को केवल फिल्मी गानों और आधुनिकता की अंधी दौड़ तक सीमित न रखें।

युवाओं को गीता और महाभारत जैसे महान ग्रंथों से जोड़ें।

बच्चों को सावित्री, माता सीता और रानी लक्ष्मीबाई जैसी महान विभूतियों के प्रेरणादायी चरित्रों के बारे में पढ़ाएं ताकि समाज में बढ़ती हिंसा और अपराध पर लगाम लग सके।

राम मंदिर और पीएम मोदी पर टिप्पणी
प्रेस क्लब के इस संवाद में जब उनसे राम मंदिर से जुड़े एक सवाल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौन को लेकर पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत मानना है कि प्रधानमंत्री के इस मौन के पीछे भविष्य का कोई बहुत बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय छुपा हो सकता है।

प्रेस क्लब ने किया भव्य स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत में रायपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने देवकीनंदन ठाकुर का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू और भूपेश जांगड़े सहित कथा आयोजक योगेश अग्रवाल और शहर के कई वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे।

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