मुंबई के लोगों के लिए मानसून की पहली बारिश कोई नई बात नहीं है। जब भी जोरदार बारिश होती है, सड़कों पर पानी भर जाता है। इंटरनेट पर जलभराव की मजेदार तस्वीरें और वीडियो तैरने लगते हैं। दफ्तर जाने वाले लोग घर से काम करने की योजना बनाने लगते हैं। रास्तों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। लेकिन इस बार इस मजाक के पीछे एक बहुत ही दर्दनाक सच सामने आया है।

सजा बन गई बारिश
कहा जाता है कि अगर आप घर के अंदर हैं तो बारिश का मजा ले सकते हैं। लेकिन अगर आप सड़क पर हैं तो यही बारिश आपके लिए सजा बन जाती है। मुंबई के लोगों को यह सजा हर साल भुगतनी पड़ती है। इस साल भी मानसून की पहली ही बारिश ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। सड़कों पर पेड़ गिर रहे हैं, दीवारें ढह रही हैं और खुले गटर लोगों की जान ले रहे हैं।
लापरवाही ने ली मासूम और बुजुर्ग की जान
इस शुरुआती बारिश में ही मुंबई के अलग-अलग इलाकों से दिल दहला देने वाली खबरें आईं। चेम्बूर इलाके में एक भारी पेड़ गिरने से 11 साल के बच्चे की मौत हो गई। इस घटना के बाद लोगों में भारी गुस्सा है कि आखिर मानसून से पहले इस खतरनाक पेड़ को छांटा या काटा क्यों नहीं गया था।
दूसरी बड़ी घटना साकीनाका में हुई। वहां पानी से भरी सड़क पर एक खुला मैनहोल यानी बड़ा गटर था जो पानी के नीचे छिपा हुआ था। एक 55 साल का बुजुर्ग उस खुले गटर में गिर गया और उसकी जान चली गई। इस बड़ी लापरवाही के बाद प्रशासन ने 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। सांताक्रूज में भी एक पेड़ गिरने से 8 लोग घायल हो गए हैं।
आपातकालीन विभाग में बजती रहीं घंटियां
बारिश के शुरुआती कुछ दिनों में ही शहर के राहत केंद्रों में मदद के लिए फोन आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। हर तरफ से पेड़ गिरने और हादसों की खबरें आ रही हैं। बचाव दल लगातार लोगों की मदद करने में जुटे हैं।