भानुप्रतापपुर। जनपद पंचायत भानुप्रतापपुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत केवटी में विकास कार्यों के नाम पर भारी वित्तीय गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच और सचिव मिलकर सरकारी राशि का जमकर बंदरबांट कर रहे हैं। पंचायत में बिना कोई नया काम किए, या पुराने कार्यों को नया बताकर लगभग 1.50 लाख रुपये से अधिक की राशि का आहरण कर लिया गया है। गांव का विकास करने की बजाय जिम्मेदार खुद की तिजोरी भरने में लगे हुए हैं।
पुराने काम, नए बिल: भ्रष्टाचार की खुली कहानी
ग्राम पंचायत केवटी में भ्रष्टाचार का यह खेल किसी एक काम में नहीं, बल्कि कई योजनाओं में खुलकर खेला गया है। ग्रामीणों द्वारा उजागर किए गए मामले इस प्रकार हैं। ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत में पहले से ही कंप्यूटर सेट मौजूद और चालू हालत में है। इसके बावजूद, नियमों को ताक पर रखकर नए कंप्यूटर खरीदी के नाम पर 26,000 रुपये का बिल पास कराकर राशि निकाल ली गई। पंचायत भवन के लिए फर्नीचर खरीदी के नाम पर भी बड़ा घालमेल सामने आया है। धरातल पर केवल दो टेबल और दो-चार कुर्सियां खरीदी गईं, लेकिन इसके एवज में ₹35,000 रुपये का भारी-भरकम बिल लगाकर राशि आहरित कर ली गई। हैंडपंप मरम्मत के नाम पर 44,100 रुपये की राशि निकाली गई है। इसके लिए बाकायदा पुरानी पानी टंकी का फोटो अपलोड कर कागजी खानापूर्ति की गई है, जबकि जमीनी हकीकत शून्य है। बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष भी इसी मद में लाखों रुपये निकाले गए थे। पंचायत भवन की मरम्मत के नाम पर 45,000 रुपये की मोटी रकम आहरित की गई है, जबकि भवन में मरम्मत के नाम पर सिर्फ नाममात्र की पोताई कराकर इतिश्री कर ली गई।

ग्रामीणों ने की भौतिक सत्यापन की मांग, फूटा आक्रोश
गांव के विकास के लिए आने वाले पैसों का सरपंच और सचिव द्वारा खुलेआम बंदरबांट किए जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों पर विकास दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि अगर उच्च अधिकारियों द्वारा ग्राम पंचायत केवटी में पिछले कुछ वर्षों में हुए सभी कार्यों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए, तो एक बहुत बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है।
जिम्मेदारों का गैर-जिम्मेदाराना बयान
ग्राम पंचायत के कार्यों को तो आप जानते ही हो… कुछ कार्य हुआ है, कुछ कार्य नहीं हुआ है। सरपंच का तो आप जानते हो।”
कृष्णा कावड़े, सचिव ग्राम पंचायत केवटी
सचिव का यह बयान खुद पंचायत की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है, जिससे साफ है कि धरातल पर काम न होने की बात उन्हें भी अच्छी तरह मालूम है।
प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार
अब देखना यह होगा कि इस गंभीर मामले की शिकायत के बाद जनपद और जिला प्रशासन के आला अधिकारी इस पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करते हैं, या फिर भ्रष्टाचार का यह खेल यूं ही परदे के पीछे चलता रहेगा।