पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के विवादित बयान से भड़का नया सियासी तूफान, बोले- मीरपुर और रावलाकोट के लोग असली कश्मीरी नहीं

. पीओके में फूटा जनता का गुस्सा, पहचान और संस्कृति पर हमला करने का लगाया आरोप

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में पहले से ही जनता के बीच भारी असंतोष और गुस्सा देखा जा रहा है। इसी बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का एक नया बयान सामने आया है, जिसने वहां की राजनीति में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि मीरपुर और रावलाकोट के रहने वाले लोग असली कश्मीरी नहीं हैं। उन्होंने इसके पीछे दलील दी कि वहां के लोग पारंपरिक कश्मीरी भाषा नहीं बोलते हैं, बल्कि वे पोटोहारी और पहाड़ी बोलियों का इस्तेमाल करते हैं। रक्षा मंत्री के इस बयान ने न केवल वहां के स्थानीय लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है, बल्कि पाकिस्तान की अपनी ही कश्मीर नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर उड़ेगी हवा, पाकिस्तान की कश्मीर नीति पर उठे गंभीर सवाल

बयान के सामने आते ही मीरपुर, रावलाकोट और पीओके के अन्य इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि यह वहां के लोगों की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को पूरी तरह से मिटाने या कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है। इंटरनेट मीडिया पर भी रक्षा मंत्री की जमकर आलोचना हो रही है। लोग इसे इस्लामाबाद में बैठे हुक्मरानों की भेदभावपूर्ण सोच का एक बड़ा उदाहरण मान रहे हैं।

राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत असहज स्थिति पैदा करने वाला है। पाकिस्तान पिछले कई दशकों से दुनिया के सामने यह दावा करता रहा है कि पूरे जम्मू-कश्मीर की जनता उसकी सोच और दावों के साथ खड़ी है। ऐसे में खुद उनके रक्षा मंत्री का यह कहना कि पीओके के एक बड़े हिस्से की आबादी असली कश्मीरी ही नहीं है, उनके अपने ही दावों की हवा निकाल देता है। आलोचक अब सीधे सवाल उठा रहे हैं कि अगर वहां के लोगों को कश्मीरी ही नहीं माना जा रहा, तो पाकिस्तान किस आधार पर दुनिया के सामने अपनी दलीलें पेश करता है।

पहले से सुलग रहे थे हालात, इस बयान ने आग में डाल दिया घी

यह पूरा विवाद एक ऐसे संवेदनशील समय पर सामने आया है जब पीओके के अलग-अलग क्षेत्रों में लोग पहले से ही बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। वहां महंगाई, बिजली का भारी संकट, बेरोजगारी और सरकार की गलत प्रशासनिक नीतियों के कारण जनता में पहले से ही बहुत गुस्सा है। पिछले कुछ महीनों में वहां सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और टकराव की कई घटनाएं भी देखी जा चुकी हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे नाजुक वक्त में रक्षा मंत्री का यह गैर-जिम्मेदाराना बयान सुलगती आग में घी डालने जैसा काम करेगा। इससे स्थानीय जनता और सरकार के बीच की दूरी बहुत ज्यादा बढ़ सकती है, जो आने वाले दिनों में पाकिस्तान के लिए बड़ी राजनीतिक मुसीबत खड़ी करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *