मंत्री टंकराम वर्मा ने किया शिक्षिका सालिनी कश्यप के बाल साहित्य का विमोचन

बलौदाबाजार। जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के दौरान जिला ऑडिटोरियम, बलौदाबाजार में शिक्षिका एवं लेखिका सालिनी कपिल कश्यप द्वारा रचित तीन पुस्तकों — “नंदू मोर संगवारी”, “चिर्रू गवांगे जंगल मा” तथा “हर बात के पीछे कहानी होथे” का विमोचन प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा के हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर कलेक्टर कुलदीप शर्मा, पुलिस अधीक्षक ओ.पी. शर्मा, जिला पंचायत बलौदाबाजार की अध्यक्ष आकांक्षा गोलू जायसवाल, जिला पंचायत सी.ई.ओ. दिव्या अग्रवाल, जनपद पंचायत बलौदाबाजार की अध्यक्ष सुलोचना यादव, जिला शिक्षा अधिकारी संदीप शर्मा, विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेंद्र टंडन, डी.एम.सी. नरेन्द्र वर्मा, ए.पी.सी. खिलावन वर्मा एवं जहीर अब्बास, छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के केंद्रीय अध्यक्ष खोड़सराम कश्यप, भारत स्काउट एवं गाइड के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय केशरवानी, मंत्री प्रतिनिधि विद्युत विभाग कपिल कश्यप, योगेश अग्रवाल, सुनीता वर्मा, जिला मुख्यालय के सभी स्कूलों के प्राचार्य, शिक्षक व विद्यार्थीगण, पत्रकार, मीडिया और शिक्षा, सामाजिक व राजनितिक जगत से जुड़े लोग सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री टंकराम वर्मा ने लेखिका सालिनी कपिल कश्यप की लेखनी की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से पुस्तकों के शीर्षकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि शीर्षकों को देखकर ही पुस्तकों को पढ़ने की उत्सुकता उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि आकर्षक और सार्थक शीर्षक पाठकों को पुस्तक की ओर सहज रूप से आकर्षित करते हैं।

विमोचित तीनों पुस्तकें बाल साहित्य पर आधारित हैं। इनमें एक मददगार बच्चे और बछड़े की संवेदनशील कहानी, किसी भी विषय पर सभी पहलुओं को समझे बिना निर्णय न लेने की सीख तथा परिवार से बिछड़ गए चिड़िया के बच्चे की भावनात्मक कथा को प्रस्तुत किया गया है। इन कहानियों के माध्यम से बच्चों में नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता, सहानुभूति तथा सकारात्मक सोच के विकास का संदेश दिया गया है। सालिनी कपिल कश्यप पिछले एक दशक से शिक्षण कार्य में सक्रिय हैं और बाल शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही हैं। बच्चों को सरल, रोचक और मूल्यपरक शिक्षा प्रदान करने के लिए उनके प्रयासों को व्यापक सराहना मिली है। इसी योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण अंतर्गत “शिक्षादूत” सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। इन तीनों पुस्तकों पर आधारित कहानियां “सालिनी की पाठशाला” यूट्यूब चैनल पर भी उपलब्ध हैं, जहां बच्चों और अभिभावकों के लिए उन्हें श्रव्य-दृश्य रूप में प्रस्तुत किया गया है।

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