मोबाइल रिचार्ज कंपनियों द्वारा टैरिफ प्लान्स की कीमतें बढ़ाए जाने के बाद से आम उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ काफी बढ़ गया है। ऐसे में कई लोग जो दो सिम कार्ड (प्राइमरी और सेकेंडरी) का इस्तेमाल करते हैं, वे हर महीने ₹299 या ₹399 का महंगा रिचार्ज कराने को मजबूर हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केवल अपना मोबाइल नंबर चालू यानी एक्टिव रखने के लिए हर बार इतने महंगे प्लान की जरूरत नहीं होती?
लाखों प्रीपेड यूजर्स सही जानकारी न होने के कारण या तो अपना जरूरी मोबाइल नंबर बंद करा बैठते हैं या फिर न चाहते हुए भी ज्यादा पैसे खर्च करते हैं। कुछ बेहद आसान और व्यावहारिक तरीके अपनाकर आप न्यूनतम खर्च में अपने सिम को चालू रख सकते हैं और एक्स्ट्रा पैसों की बचत कर सकते हैं।
क्यों बंद हो जाता है चालू सिम, भले ही उसमें बैलेंस हो?
अधिकांश मोबाइल उपभोक्ताओं के मन में यह भ्रांति होती है कि अगर उनके अकाउंट में टॉकटाइम बैलेंस मौजूद है, तो सिम कभी बंद नहीं होगा। हालांकि, प्रीपेड कनेक्शन का नियम इससे बिल्कुल अलग है। टेलीकॉम कंपनियों के नियमों के मुताबिक, किसी भी नंबर को चालू रखने के लिए मुख्य बैलेंस के साथ-साथ ‘वैलिडिटी’ (सक्रियता की अवधि) का होना सबसे जरूरी है।
जैसे ही आपके वर्तमान प्लान की वैलिडिटी समाप्त होती है, आपका नंबर ‘ग्रेस पीरियड’ में चला जाता है। इसके कुछ दिनों बाद सबसे पहले आउटगोइंग कॉल (कॉल करने की सुविधा) बंद होती है और फिर इनकमिंग कॉल आना भी बंद हो जाती है। यदि लंबे समय तक कोई रिचार्ज नहीं कराया गया, तो टेलीकॉम कंपनियां उस नंबर को हमेशा के लिए ब्लॉक कर देती हैं, जिससे उसमें बचा हुआ टॉकटाइम बैलेंस भी शून्य हो जाता है।
कंपनियों के ऐप्स में छिपे होते हैं लो-कॉस्ट वैलिडिटी प्लान्स
बहुत कम प्रीपेड यूजर्स को यह पता होता है कि रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया (Vi) जैसी बड़ी टेलीकॉम कंपनियां केवल वैलिडिटी बढ़ाने वाले विशेष ‘लो-कॉस्ट’ (कम कीमत वाले) प्लान भी पेश करती हैं। इनकी शुरुआती कीमत बेहद कम होती है।
इन छोटे पैक्स में आपको रोजाना मिलने वाला असीमित डेटा या फ्री कॉलिंग जैसे बड़े फायदे नहीं मिलते, लेकिन ये आपके सिम कार्ड की वैलिडिटी को बढ़ा देते हैं, जिससे आपकी इनकमिंग सेवाएं चालू रहती हैं। अक्सर कंपनियां इन प्लान्स को अपने मुख्य रिचार्ज सेक्शन में न दिखाकर ऐप के ‘टॉप-अप’, ‘वैल्यू पैक्स’ या ‘स्पेशल वाउचर’ वाले सेक्शन में छिपाकर रखती हैं, जिस पर आम ग्राहकों का ध्यान आसानी से नहीं जाता।
सेकेंडरी सिम को चालू रखने के लिए अपनाएं यह तरीका
यदि आप किसी नंबर का उपयोग केवल बैंक अकाउंट, यूपीआई (UPI), या आधार ओटीपी प्राप्त करने के लिए करते हैं, तो उस पर महंगे इंटरनेट पैक की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे सिम कार्ड की वैलिडिटी खत्म होने से 3-4 दिन पहले अपने फोन में रिमाइंडर सेट कर लें। समय रहते टेलीकॉम ऐप पर जाकर ‘स्मार्ट रीचार्ज’ या ‘मिनिमम वैलिडिटी पैक’ सर्च करें। इससे आप ऐन वक्त पर जल्दबाजी में महंगा प्लान लेने से बच जाएंगे।
नंबर पूरी तरह निष्क्रिय होने से हो सकता है बड़ा नुकसान
अगर लापरवाही के कारण आपका पुराना या सेकेंडरी मोबाइल नंबर पूरी तरह से निष्क्रिय (डीएक्टिवेट) हो जाता है, तो यह केवल एक सिम कार्ड का नुकसान नहीं है। वह नंबर जिस बैंक खाते, सोशल मीडिया प्रोफाइल, या सरकारी दस्तावेज से लिंक होता है, वहां ओटीपी आना बंद हो जाता है। बाद में उस नंबर को दोबारा चालू कराना या दूसरी कंपनी में पोर्ट कराना बेहद मुश्किल और खर्चीला काम बन जाता है।
जरूरी सलाह: टेलीकॉम कंपनियां अपने नियमों और रिचार्ज पैक्स की कीमतों में लगातार बदलाव करती रहती हैं। इसलिए अपने नंबर को चालू रखने के लिए कोई भी न्यूनतम रिचार्ज चुनने से पहले अपनी संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जाकर प्लान की सत्यता और वैलिडिटी की जांच अवश्य कर लें।