झुलस रहे रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव
राजकुमार मलभाटापारा- हीट इंडेक्स में पहली बार छत्तीसगढ़ के छह शहर। बहुत जल्द इसमें सातवें शहर का भी नाम देखा जा सकता है क्योंकि शहरी हरित नियोजन पर काम सिरे से गायब है। हरियाली का प्रभाव हर शहर में एक जैसा नहीं होता। कुछ परिस्थितियों में वृक्ष तापमान कम करते हैं

जबकि कुछ परिस्थितियों में नमी बढ़कर महसूस होने वाली गर्मी बढ़ा सकते हैं। नई वैज्ञानिक खोज, ‘केवल हरियाली पर्याप्त नहीं है वैज्ञानिक नियोजन आवश्यक’, में छत्तीसगढ़ जैसे राज्य को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां के पांच शहर तेज शहरीकरण और बढ़ते तापमान की चुनौती का सामना कर रहे हैं।
इसलिए हीट इंडेक्स में यह छह
रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे शहर इसलिए हीट इंडेक्स की सूची में आ चुके हैं क्योंकि तेज शहरीकरण, बढ़ता कार्बन उत्सर्जन, घटता हरित क्षेत्र, वृक्षों की कटाई के साथ कांक्रीट और डामर की सड़कों का तीव्र विस्तार अन्य शहरों की अपेक्षा ज्यादा है। एक और मजबूत वजह यह कि इन्हीं शहरों के आसपास औद्योगिक ईकाइयों की संख्या बढ़ी हुई है। बलौदा बाजार प्रदेश का ऐसा सातवां शहर हो सकता है, हीट इंडेक्स की सूची में नया नाम क्योंकि यहां भी तापमान बढ़ाने वाली गतिविधियां खूब देखी जा रहीं हैं।

वैज्ञानिक नियोजन अब बेहद जरूरी
बढ़ते तापमान को रोकने के लिए अब केवल हरियाली पर्याप्त नहीं, वैज्ञानिक नियोजन आवश्यक होगा। इसमें मैदानी शहरों में सड़कों के किनारे छायादार वृक्षों का रोपण करना होगा। मध्यम घनत्व में पौधारोपण को विशेष तौर पर ध्यान देना होगा। क्योंकि घना रोपण, वायु का संचार रोकता है। जल निकायों का संरक्षण और वेंटीलेशन कॉरिडोर बनाने होंगे। प्रदूषण सहने वाली प्रजातियों का रोपण अहम होगा। बहुस्तरीय ग्रीन बेल्ट इसलिए अनिवार्य होगा क्योंकि यह न केवल प्रदूषण रोकते हैं बल्कि तापमान को काफी हद तक कम करते हैं।
अनुशंसित प्रजातियां और पूरक उपाय
नीम, करंज, अर्जुन, जामुन, पीपल, कचनार और गुलमोहर के वृक्ष कम करते हैं तापमान और बनाए रखते हैं प्राकृतिक वायु संचरण। शहरी हरियाली के पूरक उपायों में कूल रूफ, ग्रीन रूफ, वर्षा जल संचयन, नगरीय तालाबों का पुनर्जीवन के साथ पारगम्य पथरीकरण और वर्टिकल गार्डन को वैज्ञानिक नियोजित शहरी हरियाली के अहम उपाय माने गये है। इनकी मदद से स्थानीय शहरी तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक कम किया जा सकता है। ह

रियाली, शहरी गर्मी से निपटने के प्रभावी और प्रकृति आधारित समाधान हैं। हरियाली ही है बचाव का आधारछत्तीसगढ़ के तेजी से विकसित हो रहे शहरों में बढ़ती गर्मी केवल तापमान का नहीं, बल्कि अव्यवस्थित शहरीकरण का संकेत है। शहरों में वृक्षारोपण तभी प्रभावी होगा जब इसे वैज्ञानिक तरीके से किया जाए। सही स्थान, उपयुक्त प्रजातियों का चयन, मध्यम घनत्व में रोपण, जल निकायों का संरक्षण और वायु प्रवाह के लिए खुले कॉरिडोर तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। देशज एवं प्रदूषण-सहिष्णु प्रजातियाँ न केवल छाया प्रदान करती हैं, बल्कि स्थानीय तापमान कम करने, वायु गुणवत्ता सुधारने और शहरी पर्यावरण को संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि हरित पट्टियों, कूल रूफ, वर्षा जल संचयन और नगरीय तालाबों के पुनर्जीवन जैसे उपायों को एकीकृत रूप से अपनाया जाए तो शहरों में हीट इंडेक्स के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर