चारामा (जनधारा न्यूज़)। नगर पंचायत चारामा के वार्ड क्रमांक 13 में होने वाले उपचुनाव ने अब बेहद दिलचस्प मोड़ ले लिया है। भाजपा द्वारा नए चेहरे अनूप (माली) सोनकर और कांग्रेस द्वारा दो बार के पूर्व पार्षद मोहित (भरतद्वाज) नायक को मैदान में उतारे जाने के बाद, अब इस वार्ड के मतदाता और जातीय समीकरणों की परतें खुलने लगी हैं। कुल मतदाताओं की संख्या और मिला-जुला सामाजिक ढांचा होने के कारण इस बार मुकाबला पूरी तरह अनिश्चित नजर आ रहा है।
मतदाताओं के आंकड़ों में बदलाव: महिला वोटर्स की संख्या अधिक
वार्ड क्रमांक 13 के नए आंकड़ों के अनुसार, पूर्व में यहाँ कुल 600 मतदाता थे, लेकिन वर्तमान संशोधनों के बाद अब इस वार्ड में लगभग 533 मतदाता रह गए हैं। इस चुनावी रण में महिला मतदाताओं की भूमिका बेहद निर्णायक होने वाली है, क्योंकि पुरुष मतदाताओं की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है:
वार्ड में कुल मतदाता 533 हैं,जिसमे महिला मतदाता 280 और पुरुष मतदाता 253 हैं.
उलझा हुआ जातीय समीकरण: किसी एक पक्ष में लहर नहीं
यह वार्ड पूरी तरह से एक ‘मिला-जुला वार्ड’ है, जहाँ किसी एक जाति का एकतरफा वर्चस्व नहीं है। हालांकि, अलग-अलग समाजों की मौजूदगी यहाँ के चुनावी गणित को उलझा रही है:जिसमे
सिन्हा समाज के लगभग सर्वाधिक 70 मतदाता (बहुतायत में),
साहू समाज के 65 मतदाता,
सोनकर (माली) समाज के 55 मतदाता,
यादव समाज के 50 मतदाता,
आदिवासी समाज के लगभग 30 मतदाता,
कौशिक समाज के लगभग 30 मतदाता,
अन्य समाज (मिश्रित)लगभग 100 मतदाता, और अन्य मतदाता हैं।
इस विविध सामाजिक संरचना के कारण वार्ड का समीकरण फिलहाल पूरी तरह अस्पष्ट है। कोई भी राजनीतिक विश्लेषक दावे के साथ यह नहीं कह पा रहा है कि ऊँट किस करवट बैठेगा।
वार्ड की सबसे बड़ी और पुरानी समस्या: रेत के भारी वाहनों का गुजरना
राजनीतिक समीकरणों के बीच इस वार्ड की एक बहुत पुरानी और गंभीर जन-समस्या भी इस चुनाव में हावी है। उल्लेखनीय है कि इसी वार्ड में क्षेत्र का मुख्य शासकीय अस्पताल, रेस्ट हाउस और नगर का सबसे बड़ा हनुमान मंदिर स्थित है। इतनी महत्वपूर्ण जगह होने के बावजूद, यहाँ की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस वार्ड की गलियों और मुख्य रास्तों से होकर दिन-रात रेत के बड़े-बड़े हाईवा व ट्रक गुजरते हैं।
इस रिहायशी इलाके से रेत परिवहन को पूरी तरह बंद करने की मांग स्थानीय नागरिकों द्वारा हमेशा से उठाई जाती रही है। हर चुनाव के पूर्व नेताओं द्वारा यह वादे कई बार सामने आए हैं कि “जीतने के बाद हम यहाँ से रेत की गाड़ियों की एंट्री बंद करवा देंगे।” लेकिन अब तक यह समस्या जस की तस बनी हुई है। ऐसे में जनता के बीच यह सवाल बड़ा है कि जो भी प्रत्याशी जीतकर आएगा, क्या वह इस काम को पूर्ण कर पाएगा या नहीं?
नया चेहरा बनाम पुराना व्यवहार और काम
इस बहुकोणीय सामाजिक ताने-बाने और अनसुलझे मुद्दों के बीच मुख्य मुकाबला रणनीतियों और व्यक्तिगत छवि पर टिक गया है। भाजपा जहाँ सोनकर बाहुल्य और नए चेहरे की ऊर्जा के दम पर चुनाव जीतने की उम्मीद लगाए हुए है, वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी मोहित नायक के पास उनके दो बार पार्षद रहने का अनुभव है।
अब क्षेत्र में चर्चा इस बात की है कि क्या मतदाता जातिगत और स्थानीय समस्याओं को देखकर मतदान करेंगे, या फिर मोहित नायक के पुराने विकास कार्यों और उनके मिलनसार व अच्छे व्यवहार पर भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा मौका देंगे।
यह सारे कयास और सस्पेंस आगामी 1 जून 2026 को होने वाले मतदान के दिन ही स्पष्ट हो पाएंगे, जब मतदाता ईवीएम का बटन दबाकर इन दोनों प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे।
रिपोर्ट: अनूप वर्मा
चारामा नगर पंचायत उपचुनाव: वार्ड 13 में जातिगत समीकरणों का उलझा ताना-बाना, क्या नए चेहरे पर टिकेगा भरोसा या व्यवहार दिलाएगा जीत?

17
May