नई दिल्ली। उन्नाव के चर्चित रेप कांड में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित (Suspend) कर दिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह दो महीने के भीतर इस मामले पर नए सिरे से विचार कर फैसला सुनाए।
हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले में सीबीआई (CBI) की अपील पर सुनवाई करते हुए यह बड़ा आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि हाईकोर्ट अब जब इस मामले पर दोबारा सुनवाई करेगा, तो वह सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से प्रभावित न हो। यानी हाईकोर्ट को अब मेरिट के आधार पर नए सिरे से तय करना होगा कि सेंगर को राहत मिलनी चाहिए या नहीं।
क्या है पूरा मामला? जिसने देश को हिला दिया था
यह मामला जून 2017 का है, जब उत्तर प्रदेश के उन्नाव में तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर पर एक नाबालिग लड़की ने रेप का आरोप लगाया था। आरोप था कि नौकरी दिलाने के नाम पर बुलाकर विधायक ने उसके साथ गलत काम किया। रसूख के चलते शुरुआत में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
पीड़िता ने इंसाफ के लिए 2018 में लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश की, तब जाकर यह मामला नेशनल मीडिया की सुर्खियों में आया। इसके बाद सेंगर की गिरफ्तारी हुई और सीबीआई ने जांच संभाली।
जेल में पिता की मौत और संदिग्ध एक्सीडेंट
इस केस के दौरान पीड़िता के पिता की जेल में संदिग्ध मौत हो गई थी। हद तो तब हो गई जब जुलाई 2019 में पीड़िता के परिवार की कार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी। इस हादसे में पीड़िता की दो रिश्तेदारों की जान चली गई, जिसे परिवार ने एक साजिश करार दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूरे केस को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया था।
दिसंबर 2019 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और 25 लाख का जुर्माना लगाया था। अब सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद सेंगर के लिए जेल से बाहर आने की राह फिर से मुश्किल हो गई है।