भानुप्रतापपुर। वन मंडल भानुप्रतापपुर के अंतर्गत ग्राम बांसला के जंगलों में एएनआर कार्य और फेंसिंग के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मीडिया की सक्रियता और ग्राउंड रिपोर्टिंग के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। जो काम महीनों से अधूरा पड़ा था और जिसके पैसे डकारे जा चुके थे, वह खबर प्रकाशित होते ही आनन-फानन में दोबारा शुरू कर दिया गया है।
बांसला के जंगलों में कूप कटाई के बाद छोटे पौधों के संरक्षण के लिए फेंसिंग की जानी थी। आरोप है कि पूर्व रेंजर पंकज पटेल के कार्यकाल के दौरान मटेरियल सप्लायरों को काम पूरा होने से पहले ही पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया। मौके पर केवल आधा मटेरियल ही पहुँचा था। इतना ही नहीं, मस्ट रोल में उन मजदूरों के नाम भरकर राशि आहरित कर ली गई, जो कभी काम पर आए ही नहीं। मुख्य वन संरक्षक कांकेर को इस पूरे मामले की लिखित शिकायत सौंपी जा चुकी है। अब देखना यह है कि प्रशासन दोषियों को बचाता है या उन पर नकेल कसता है।
अधिकारियों के बयानों में फंसा पेंच: चोरी या सीनाजोरी?
इस मामले में विभाग की किरकिरी तब और बढ़ गई जब दो जिम्मेदार अधिकारियों के बयान आपस में भिड़ गए।डीएफओ ऋषभ जैन का दावा कर रहे है कि उन्होंने तर्क दिया कि फेंसिंग का कार्य पूर्ण हो चुका था, लेकिन लगभग 100 मीटर फेंसिंग चोरी हो गई है। वहीं डिप्टी रेंजर मोनीष मण्डावी ने एडीएफओ के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कार्य अभी पूर्ण ही नहीं हुआ था। अधिकारियों के विरोधाभासी बयान साफ संकेत दे रहे हैं कि भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए ‘चोरी’ की झूठी पटकथा गढ़ी गई थी।
मजदूरों ने खोली पोल
मौके पर काम कर रहे मजदूर हरेंद्र चक्रधारी, हिरामन चक्रधारी, तमेश जुर्री, पिंटू चक्रधारी, जगत चक्रधारी, डिकेश चक्रधारी, सचिन चक्रधारी, रमेश चक्रधारी, राजकमल नायक, प्रशांत नायक, डिगेश देहारी, चिन्टू देहारी, द्वारिका नाग ने बताया कि मटेरियल खत्म होने के कारण काम बंद था। मीडिया में खबरें आने के बाद अब गिट्टी, पोल और अन्य सामान गिराया गया है। मजदूरों के अनुसार, अभी भी लगभग 1800 मीटर फेंसिंग का कार्य शेष है, जिसे अब आनन-फानन में पूरा किया जा रहा है।
मुख्यालय के पास यह हाल, तो अंदरूनी इलाकों में क्या?
बांसला का जंगल डिवीजन मुख्यालय के करीब है, इसलिए मामला उजागर हो गया। लेकिन स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि दुर्गुकोंदल, अंतागढ़ और आमाबेड़ा जैसे सुदूर क्षेत्रों का क्या हाल होगा? विभागीय सूत्रों का कहना है कि अंदरूनी इलाकों में वनीकरण के कार्य केवल कागजों पर ‘हरे-भरे’ हैं। दुर्गुकोंदल वन परिक्षेत्र में भी एएनआर कार्य में भारी अनियमितता की खबरें हैं, जिसका खुलासा जल्द होने की उम्मीद है। क्या वन विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेकर जांच कमेटी गठित करेंगे? क्या सरकारी धन का गबन करने की कोशिश करने वाले अधिकारियों और पूर्व रेंजर पंकज पटेल पर कड़ी कार्रवाई होगी?