नारद जयंती पर हुआ कार्यक्रम का आयोजन

बेमेतरा नारद जयंती के पावन अवसर पर देशभर में, विशेषकर विश्व संवाद केंद्र के सहयोग से विभिन्न संगोष्ठियों और पत्रकार वार्ताओं का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में देवर्षि नारद को ब्रह्मांड का ‘प्रथम पत्रकार’ मानते हुए निष्पक्ष, सकारात्मक और जनहितकारी पत्रकारिता के मूल्यों पर गहन मंथन हुआ। इसी कड़ी में के के रेस्टोरेंट बेमेतरा में नारद जयंती पर समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया।

नकारात्मक नैरेटिव और ऐतिहासिक संदर्भ: आर. कृष्णा दास
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार और वरिष्ठ पत्रकार आर. कृष्णा दास (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) ने वर्तमान पत्रकारिता के स्वरूप पर बेबाकी से विचार रखे।
नैरेटिव का खेल: उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता ‘नैरेटिव’ (विमर्श) के आधार पर संचालित हो रही है। उन्होंने बंगाल चुनाव के उदाहरणों और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे तथ्यों को एक विशेष चश्मे से पेश किया जाता है।

छवि के साथ खिलवाड़: श्री दास ने इस बात पर चिंता जताई कि फिल्मों और नाटकों में देवर्षि नारद को अक्सर एक ‘कलहकारी’ या ‘खल’ चरित्र के रूप में दिखाया गया, जो कि एक नकारात्मक नैरेटिव का हिस्सा है। जबकि वास्तविकता में नारद जी पत्रकारिता की आत्मा हैं।

सत्य की उपेक्षा: उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह समाज में राजा हरिश्चंद्र या सती सावित्री जैसे आदर्श चरित्रों को व्यंग्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाने लगा है, वही स्थिति डॉ. मुखर्जी के साथ भी की गई थी। यह सब समाज को भ्रमित करने की एक सोची-समझी कला है।

पत्रकार का दायित्व और सोशल मीडिया की चुनौतियां
सच्ची पत्रकारिता का उद्देश्य भ्रम फैलाना नहीं, बल्कि समाज और सरकार को सच्चाई का आईना दिखाना है। श्री दास ने सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक चैनलों के दौर में सजगता पर जोर दिया।

तीनों लोकों के सेतु थे देवर्षि नारद: जितेंद्र शुक्ला
श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र शुक्ला ने नारद जी के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि:
“नारद जी मात्र एक संवाद वाहक नहीं बल्कि एक ‘समाधान कर्ता’ थे। उन्होंने असुरों और देवताओं के बीच संवाद का सेतु बनाया ताकि सत्य की जीत हो सके। मीडिया का स्वरूप भले बदला हो, लेकिन सत्य की खोज का आधार नारद जी के मूल्यों पर ही टिका है।”

निर्भीकता और निष्पक्षता का महत्व: सुजीत शर्मा
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एन डी टी वी पत्रकार सुजीत शर्मा ने एकतरफा रिपोर्टिंग से बचने की सलाह दी। उन्होंने जोर दिया कि एक पत्रकार को निर्भीकता के साथ अपने विचार स्पष्ट रखने चाहिए और खबर की निष्पक्षता से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।

कार्यक्रम आयोजक बोधि राम निषाद ने संबोधन में कहा
पत्रकार की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है ,बिना जांचे-परखे किसी भी तथ्य को प्रकाशित न करें।भ्रामक और निराधार खबरों के प्रति विशेष सावधानी बरतें।पत्रकारिता का मूल धर्म लोक-कल्याण होना चाहिए जो नारद जी ने किया।

आज पत्रकारिता के क्षेत्र में कुछ विद्रूपताएं भी देखने को मिल रही हैं। जब पत्रकारिता सत्ता की चाटुकारिता में उलझ जाती है, तो जनता की पुकार दब जाती है।
चौथा स्तंभ की गरिमा: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का असली अर्थ स्वतंत्र पत्रकारिता से है, जहाँ देशहित सर्वोपरि हो।
सच्चाई का मोती: सच्चा पत्रकार वही है जो सूचनाओं के अथाह समंदर में गोता लगाकर ‘सत्य का मोती’ बाहर निकाल लाए।नारद जी एक ऐसे पत्रकार थे जो स्वयं भगवान विष्णु को भी धरती की पीड़ा दिखाने के लिए विवश कर देते थे। आज के पत्रकारों को भी इसी अदम्य साहस और सत्यनिष्ठा की आवश्यकता है।

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