रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा 21 अप्रैल 2026 को जारी आदेश और मात्र 24 घंटे के भीतर 22 अप्रैल को उसे निरस्त किए जाने से बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रवादी संगठन भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
वीरेन्द्र नामदेव ने कहा कि जब सिविल सेवा (आचरण) नियम पहले से स्पष्ट और प्रभावी हैं, तब नया आदेश जारी करने की आवश्यकता ही क्या थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आदेश इतना ही त्रुटिपूर्ण था कि 24 घंटे के भीतर उसे निरस्त करना पड़ा, तो आखिर ऐसा आदेश जारी ही क्यों किया गया? यह पूरा मामला अब कई सवालों के घेरे में है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आदेश में जोड़ा गया बिंदु क्रमांक 3 जानबूझकर ऐसा रखा गया, जिससे अनावश्यक विवाद और भ्रम की स्थिति पैदा हो। नामदेव के अनुसार यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि विभागीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले सरकार की साख को कमजोर करते हैं और यह संकेत देते हैं कि बिना समुचित परीक्षण और जिम्मेदारी के आदेश जारी किए जा रहे हैं। नामदेव ने स्पष्ट कहा कि इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।
प्रांताध्यक्ष ने कड़ी मांग करते हुए कहा कि इस आदेश के लिए जिम्मेदार अधिकारियों, जिसमें संबंधित सचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं, को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार के “भ्रम और विवाद पैदा करने वाले” आदेश जारी होते रहे, तो इससे न केवल कर्मचारियों में असंतोष बढ़ेगा, बल्कि शासन की विश्वसनीयता पर भी गंभीर असर पड़ेगा।
अंत में नामदेव ने कहा कि सरकार यदि अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखना चाहती है, तो उसे अपने ही आदेशों पर गंभीरता से अमल करना होगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।