बड़ी खबर: चारामा में ‘ब्याज माफिया’ का खेल, कर्ज के नाम पर निगल रहे किसानों की पुश्तैनी जमीनें!

चारामा: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के चारामा विकासखंड से धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ ‘ब्याज माफिया’ का एक गिरोह सक्रिय है, जो गरीब किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें कर्ज के जाल में फंसाता है और फिर धोखाधड़ी से उनकी करोड़ों की जमीन अपने नाम करवा लेता है।

​विधायक सावित्री मंडावी की शरण में पहुंचे पीड़ित किसान
​ग्राम मायाना, मरकाटोला और चारभाटा के दर्जनों किसान न्याय की गुहार लेकर भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी के पास पहुंचे। किसानों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कैसे उन्हें उनकी ही जमीनों से बेदखल करने की साजिश रची जा रही है।

​साजिश का पर्दाफाश: 2% का लालच और फिर 30% की लूट
​पीड़ित किसान रामचरण, तुलसीराम, छन्नू राम, दयालुराम और महिला किसान जोहतरी ने बताया कि मुख्य आरोपी टेमन लाल साहू और उसके साथियों ने पहले उन्हें खेती के लिए मात्र 2 प्रतिशत ब्याज पर पैसे देने का लालच दिया।महज एक-दो महीने बाद ही ब्याज दर को बढ़ाकर 20 से 30 प्रतिशत कर दिया गया,जब किसान भारी-भरकम ब्याज देने में असमर्थ हुए, तो माफिया ने मूलधन को तीन गुना बढ़ाकर जमीन ‘गिरवी’ रखने का दबाव बनाया, किसानों का आरोप है कि आरोपियों ने ‘हाफ रजिस्ट्री’ (गिरवी दस्तावेज) के नाम पर दस्तखत करवाए, लेकिन तहसील कार्यालय में मिलीभगत कर ‘फुल रजिस्ट्री’ (विक्रय बैनामा) करवा ली।इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब आरोपी टेमन लाल साहू बाहरी खरीदारों को लेकर किसानों के खेतों पर पहुंचा और जमीन का सौदा करने लगा। जब परेशान किसान रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि उनकी जमीन कागजों पर बिक चुकी है, जबकि आज भी जमीन पर उनका ही कब्जा (काश्त) है।

​प्रशासनिक सुस्ती: 3 महीने बाद भी FIR नहीं
​हैरानी की बात यह है कि किसानों ने 15 जनवरी 2026 को ही पुलिस अधीक्षक (SP) से लिखित शिकायत की थी। लेकिन 3 महीने बीत जाने के बावजूद अब तक पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। कार्रवाई न होने से भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और किसानों में अपनी जमीन खोने का गहरा डर बना हुआ है।

​विधायक से कड़ी कार्रवाई की मांग
​किसानों ने विधायक सावित्री मंडावी से मांग की है कि जमीनों की अगली खरीदी-बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।आरोपी टेमन लाल साहू और उसके गिरोह पर आपराधिक मामला (FIR) दर्ज हो।​

मामले की उच्च स्तरीय जांच कर किसानों की जमीनें वापस दिलाई जाएं।

​अब देखना यह होगा कि विधायक की दखल के बाद क्या सोता हुआ प्रशासन जागेगा? या अन्नदाता ऐसे ही भू-माफियाओं की भेंट चढ़ता रहेगा?

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