दुर्गूकोंदल: अवैध रेत खनन और मशीनों के प्रयोग पर भड़के ग्रामीण, 20 अप्रैल से उग्र आंदोलन की चेतावनी

भानुप्रतापपुर। विकासखंड दुर्गूकोंदल में रेत खनन को लेकर जारी विवाद अब गहराता जा रहा है। रेत तस्करों द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाने और प्रशासन की कथित शिथिलता के विरोध में पूर्व जनपद सदस्य शोपसिंग आचला ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर अवैध खनन में लिप्त चैन माउंटेन मशीनों और ओवरलोड हाईवा को 15 अप्रैल तक राजसात (जप्त) करने की मांग की है।

मशीनों से हो रहा अवैध खनन, नियमों की अनदेखी

पूर्व जनपद सदस्य शोपसिंग आचला ने बताया कि ग्राम पंचायत परभेली भेलवापानी, गुदुम फित्तेफुलचुर और भंडारडिगी डांगरा में लीज पर रेत खदानें आवंटित हैं। नियमानुसार इन खदानों में रेत की लोडिंग केवल मजदूरों द्वारा की जानी चाहिए और चैन माउंटेन मशीनों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। इसके बावजूद, तस्करों द्वारा धड़ल्ले से मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि डंडईखेड़ा, मेरेगांव और गुदुम में अवैध रेत खदानें संचालित हैं। ग्रामीणों के विरोध के कारण दिन में काम बंद रहता है, लेकिन आधी रात होते ही चैन माउंटेन मशीनों के जरिए हाईवा वाहनों में रेत भरकर बेखौफ परिवहन किया जा रहा है।

क्षमता से अधिक भार: टूट रही हैं प्रधानमंत्री सड़कें

शिकायत में सड़कों की बदहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है।
लोहत्तर से जाड़ेकुर्स मार्ग, संबलपुर-दमकसा मार्ग और परभेली-शीतलपुर-भेलवापानी मार्ग की क्षमता केवल 12 टन है।
इन सड़कों पर प्रतिबंधित होने के बावजूद 50 टन रेत से लदे ओवरलोड हाईवा वाहन रात के अंधेरे में दौड़ रहे हैं, जिससे करोड़ों की लागत से बनी सड़कें जर्जर हो रही हैं।

प्रशासन पर ‘मिलीभगत’ के आरोप

आचला और युवा नेता दीनदयाल पटेल ने जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग मशीनों को जप्त करने के बजाय केवल मामूली जुर्माना लगाकर खदानों में ही छोड़ देते हैं, जिससे माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। प्रशासन रेत चोरी रोकने और सड़कों को बचाने में पूरी तरह अक्षम साबित हो रहा है।

आंदोलन का अल्टीमेटम: अर्धनग्न प्रदर्शन और नगाड़ा वादन

ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 15 अप्रैल 2026 तक मशीनीकरण बंद नहीं हुआ और वाहनों को राजसात नहीं किया गया, तो चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन किया जाएगा। 20 अप्रैल: अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन।
24 अप्रैल विभाग को जगाने के लिए ‘नगाड़ा बजाओ’ कार्यक्रम। 27 अप्रैल अधिकारियों की सद्बुद्धि के लिए विशेष पूजा-अर्चना।
30 अप्रैल शासन-प्रशासन के विरुद्ध अर्धनग्न प्रदर्शन।

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