रायसेन (मध्यप्रदेश), 4 अप्रैल 2026। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले से सरकारी लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है, जहां वेयरहाउस में रखा हजारों मीट्रिक टन गेहूं सड़कर बर्बाद हो गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, करीब 35 करोड़ रुपये कीमत का गेहूं पूरी तरह खराब हो चुका है।

हैरानी की बात यह है कि इस अनाज को बचाने के प्रयास में रखरखाव, किराया और कीटनाशक छिड़काव पर खर्च बढ़कर लगभग 150 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके बावजूद अनाज को सुरक्षित नहीं रखा जा सका।
बताया जा रहा है कि वेयरहाउस में करीब 22 हजार टन गेहूं लंबे समय तक पड़ा रहा। खराब हो रहे अनाज को बचाने के लिए करीब 34 बार कीटनाशकों का छिड़काव किया गया, लेकिन स्थिति इतनी बिगड़ गई कि यह गेहूं अब पशुओं के चारे के योग्य भी नहीं बचा। विशेषज्ञों ने इसे स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक बताया है।
जानकारी के अनुसार, यह गेहूं वर्ष 2022 में सीहोर जिले के बकतरा क्षेत्र से रायसेन के औबेदुल्लागंज स्थित वेयरहाउस में शिफ्ट किया गया था। इस फैसले पर अब सवाल उठ रहे हैं कि जब पहले से ही भंडारण की स्थिति खराब थी, तो इतनी बड़ी मात्रा में अनाज को यहां रखने की अनुमति क्यों दी गई।
सवाल यह भी उठ रहा है कि किन परिस्थितियों या दबाव में एक जिले से दूसरे जिले में हजारों टन गेहूं स्थानांतरित किया गया। पहले भी जिन वेयरहाउसों में अनाज खराब होने की स्थिति सामने आ चुकी थी, वहीं पर इसे रखने का निर्णय क्यों लिया गया—यह अब जांच का विषय बन गया है।
फिलहाल, प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। खराब हो चुके गेहूं को नीलाम करने या नष्ट करने पर निर्णय लिया जा सकता है। इस पूरे मामले ने भंडारण व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।