पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण संघर्ष अब भारतीय प्रवासियों के लिए काल बनता जा रहा है। सोमवार तड़के कुवैत के एक प्रमुख बिजली और पानी डीसैलिनेशन प्लांट पर हुए ईरानी हमले में एक भारतीय कर्मचारी की दर्दनाक मौत हो गई। इस ताजा घटना के बाद खाड़ी देशों के युद्धग्रस्त क्षेत्रों में जान गंवाने वाले भारतीयों की कुल संख्या बढ़कर 8 हो गई है।
कुवैत के बिजली और पानी मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस हमले की पुष्टि की है। मंत्रालय की प्रवक्ता फातिमा अब्बास जौहर हयात के मुताबिक, ईरानी हमले का निशाना प्लांट की एक सर्विस बिल्डिंग बनी, जिसमें कार्यरत भारतीय नागरिक की मौत हो गई और इमारत को भी भारी क्षति पहुंची है।
लगातार बढ़ रहा है मौतों का आंकड़ा
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की हालिया ब्रीफिंग के अनुसार, पश्चिम एशिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी गोलाबारी और हमलों में अब तक कुल 8 भारतीय नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें से एक मौत पिछले सप्ताह अबू धाबी में हुए हमले में हुई थी, जबकि एक भारतीय नागरिक अभी भी लापता बताया जा रहा है। ओमान, इराक और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित भारतीय दूतावास लापता व्यक्ति की तलाश और मृतकों के पार्थिव शरीरों को स्वदेश भेजने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय कर रहे हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन: अब तक 4.75 लाख भारतीयों की घर वापसी
युद्ध के बिगड़ते हालात के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘मिशन मोड’ में काम शुरू कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:
सुरक्षित वापसी: 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 4.75 लाख भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं।
हवाई मार्ग: सऊदी अरब और ओमान के रास्ते भारतीयों को लाया जा रहा है। कतर का एयरस्पेस आंशिक रूप से खुलने के बाद वहां से भी निकासी जारी है।
वैकल्पिक रास्ते: UAE और बहरीन के हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण भारतीयों को जॉर्डन, आर्मेनिया और सऊदी अरब के जमीनी व अन्य वैकल्पिक मार्गों से भारत लाया जा रहा है।
भारत सरकार ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और स्पष्ट किया है कि युद्ध क्षेत्र में फंसे हर एक भारतीय की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।