नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश में रसोई गैस प्रबंधन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। नए आदेश के अनुसार, जिन क्षेत्रों में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर का मोह छोड़ना होगा। यदि उपभोक्ता पीएनजी का उपयोग शुरू नहीं करते हैं, तो उनके घरों में मिलने वाली एलपीजी की सप्लाई स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश में गैस नेटवर्क का तेजी से विस्तार करना और ईंधन के लिए किसी एक स्रोत पर निर्भरता को कम करना है। वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के चलते भारत में एलपीजी के आयात पर असर पड़ा है, जिससे विशेषकर कमर्शियल गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन भविष्य के संकटों से बचने के लिए सरकार ने यह कड़ा रुख अपनाया है।
डेटा के अनुसार, देश में वर्तमान में करीब 33.05 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता हैं, जबकि पीएनजी कनेक्शन की संख्या 1.57 करोड़ के आसपास है। राजधानी दिल्ली जैसे शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे घर हैं जिनके पास एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन मौजूद हैं। आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के 44 लाख एलपीजी कनेक्शनों में से करीब 1.27 लाख घरों में पीएनजी की सुविधा भी है। सरकार ने ऐसे दोहरे कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को बार-बार अलर्ट भेजकर सिलेंडर सरेंडर करने की अपील की है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत भी देश में 10.35 करोड़ से अधिक लाभार्थी जुड़े हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे, इसके लिए तेल कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कमर्शियल गैस के बजाय घरेलू रसोई गैस को प्राथमिकता दी जा रही है। वैकल्पिक रास्तों से गैस आयात की कोशिशें भी तेज कर दी गई हैं ताकि उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की किल्लत का सामना न करना पड़े।