बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड की फाइल 23 साल बाद एक बार फिर खुल गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बिलासपुर हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई दोबारा प्रारंभ हो गई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने मामले के आरोपी अमित जोगी और याचिकाकर्ता सतीश जग्गी को नोटिस जारी कर अपने अधिवक्ताओं के साथ न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
अदालत ने इन नोटिसों की तामिली की जिम्मेदारी रायपुर पुलिस अधीक्षक (SP) को सौंपी है। निर्देश के अनुसार, नोटिस तामिल कराने के बाद रायपुर एसपी को इस संबंध में शपथ पत्र पेश कर कोर्ट को जानकारी देनी होगी।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी प्रक्रिया
याचिकाकर्ता सतीश जग्गी के अधिवक्ता बीपी शर्मा ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को पुनर्विचार के लिए वापस बिलासपुर हाई कोर्ट भेजा है। इससे पहले, साल 2011 में हाई कोर्ट की समन्वय पीठ ने तकनीकी आधारों पर राज्य सरकार और सीबीआई की अपीलों को खारिज कर दिया था। इसके बाद सतीश जग्गी और सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 6 नवंबर 2025 को पारित अपने आदेश में अपील दायर करने में हुई देरी को क्षमा करते हुए मामले को गुण-दोष के आधार पर दोबारा सुनने के लिए हाई कोर्ट को निर्देशित किया है। शीर्ष अदालत ने सीबीआई को यह भी निर्देश दिया है कि वह इस कार्यवाही में वास्तविक शिकायतकर्ता और राज्य सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाए।
क्या है जग्गी हत्याकांड?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के तत्कालीन नेता रामअवतार जग्गी की 4 जून 2003 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी और एनसीपी के कोषाध्यक्ष थे। इस हत्याकांड में पुलिस ने कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया था।
निचली अदालत के फैसले के बाद इस मामले में अमित जोगी को छोड़कर अन्य 28 आरोपियों को दोषी करार दिया गया था। अमित जोगी के बरी होने के खिलाफ रामअवतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। वर्तमान में अमित जोगी के पक्ष में स्टे ऑर्डर प्रभावी है, लेकिन अब हाई कोर्ट में दोबारा सुनवाई शुरू होने से इस हाई-प्रोफाइल मामले में नए घटनाक्रम की उम्मीद है।
दोषियों की सूची
इस मामले में अब तक अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी समेत अन्य कई आरोपियों को दोषी पाया गया है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच अब सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत इस मामले के विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।