रायपुर में अस्पताल माफिया का खेल! आयुष्मान कार्ड के साथ 7 लाख नकद लेने का आरोप, मरीज की मौत के बाद परिवार ने खोला मोर्चा
रायपुरा चौक स्थित ग्लोबल स्टार हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप – इलाज के नाम पर लाखों वसूले, हालत बिगड़ने पर कोविड का बहाना बनाकर मरीज को निकाला
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में निजी अस्पतालों पर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अब रायपुरा चौक स्थित ग्लोबल स्टार हॉस्पिटल पर भी अस्पताल माफिया की तरह काम करने के आरोप लगे हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान कार्ड से इलाज का भरोसा देकर लाखों रुपये की वसूली की और बाद में मरीज की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल से बाहर कर दिया, जिसके बाद दूसरे अस्पताल में मरीज की मौत हो गई।

पीड़ित राजेंद्र कौशिक ने बताया कि उनके पिता परस राम कौशिक का सड़क दुर्घटना में गंभीर एक्सीडेंट हो गया था, जिसके कारण उनके दिमाग में ब्लड क्लॉटिंग हो गई थी। इलाज के लिए वे उन्हें रायपुरा चौक स्थित ग्लोबल स्टार हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। शुरुआत में अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान कार्ड से इलाज करने की बात कही, लेकिन बाद में इलाज शुरू करने में देरी की गई।

परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने उनसे लगभग 7 लाख रुपये नगद लिए, जबकि आयुष्मान कार्ड से भी करीब 5 लाख रुपये की राशि ली गई। परिवार का कहना है कि अस्पताल की ओर से यह कहा गया कि आयुष्मान कार्ड से केवल आईसीयू का खर्च कवर होगा, बाकी राशि उन्हें नकद देनी होगी। इतना ही नहीं, आरोप है कि नकद लिए गए पैसों का कोई बिल भी परिजनों को नहीं दिया गया।

राजेंद्र कौशिक के अनुसार, जब मरीज की हालत लगातार बिगड़ने लगी और अस्पताल प्रबंधन को पूरी रकम मिल गई, तब उन्हें अस्पताल से बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी गई। इसके लिए कथित तौर पर कोविड संक्रमण का हवाला दिया गया। परिवार का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टर जयवर्धन ने कहा कि कोविड की नई लहर आने वाली है, इसलिए मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज करना पड़ेगा।
परिजन जब अपने पिता को लेकर दूसरे अस्पताल डीके अस्पताल पहुंचे, तब तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पीड़ित परिवार का दावा है कि उनके पास नगद भुगतान के सबूत और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसमें कथित तौर पर डॉक्टर जयवर्धन यह कहते हुए सुनाई पड़ रहे हैं कि “तुम्हें जो करना है कर लो, हां मैंने पैसे लिए हैं।”

राजेंद्र कौशिक ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से भी की है। हालांकि, शिकायत किए बहुत समय होगया हैं और उनके पिता की मौत को करीब 7 से 8 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे कोर्ट और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
यह मामला राजधानी रायपुर में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर कब तक राजधानी में अस्पतालों पर इस तरह के आरोप सामने आते रहेंगे और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले की जांच कर आरोपों की सच्चाई सामने लाता है या नहीं, और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा।