नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर आई है। केंद्र सरकार ने IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) से जुड़े नियमों में ऐतिहासिक ढील दी है, जिससे अब देश की दिग्गज कंपनियों के लिए बाजार में उतरना बेहद आसान हो गया है। इस बदलाव के बाद अब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और रिलायंस जियो (Jio) जैसी ‘मेगा कंपनियों’ की लिस्टिंग की राह में आने वाली सबसे बड़ी अड़चन दूर हो गई है।
क्या हुआ है बड़ा बदलाव?
शुक्रवार देर रात जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, अब जिन कंपनियों की वैल्यूएशन लिस्टिंग के बाद 5 लाख करोड़ रुपये (57 अरब डॉलर) से अधिक होगी, उन्हें अपने IPO में कुल पेड-अप कैपिटल का कम से कम सिर्फ 2.5 फीसदी हिस्सा ही बेचना होगा। इससे पहले यह सीमा अधिक थी, जिसके कारण बड़ी कंपनियों को अपना बड़ा हिस्सा बाजार में लाना पड़ता था।
नई समय-सीमा और नियम (ग्लाइड पाथ)
सरकार ने कंपनियों को अपनी हिस्सेदारी कम करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया है:
वैल्यूएशन के आधार पर छूट: 1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू वाली कंपनियों के लिए न्यूनतम ‘पब्लिक फ्लोट’ 2.75% और 50,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ के बीच की कंपनियों के लिए 8% तय किया गया है।
समय की राहत: यदि लिस्टिंग के समय पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15% से कम है, तो कंपनियों के पास 15% तक पहुंचने के लिए 5 साल और 25% तक पहुंचने के लिए कुल 10 साल का समय होगा।
सुपीरियर वोटिंग राइट्स: यदि किसी कंपनी के पास विशेष वोटिंग अधिकारों वाले शेयर हैं, तो उन्हें साधारण शेयरों के साथ ही लिस्ट करना अनिवार्य होगा।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
इस फैसले को बाजार में पैसों की ‘सुनामी’ के तौर पर देखा जा रहा है। रिलायंस जियो और एनएसई जैसी दिग्गज कंपनियों के आने से मार्केट कैपिटलाइजेशन में भारी इजाफा होगा और दुनिया भर के बड़े निवेशक भारतीय बाजार की ओर आकर्षित होंगे। इससे छोटे निवेशकों को भी बड़ी और सुरक्षित कंपनियों में पैसा लगाने का मौका मिलेगा।