नई दिल्ली। देश की युवा पीढ़ी को नशे की गर्त में धकेलने वाले घातक ड्रग ‘मेफेड्रोन’, जिसे गलियों और रेव पार्टियों में ‘म्याऊं-म्याऊं’ के नाम से जाना जाता है, पर भारत सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। गृह मंत्रालय की सख्ती के बाद इस सिंथेटिक ड्रग को तैयार करने वाले मुख्य कच्चे माल (कैमिकल) पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कदम नशे के सौदागरों की कमर तोड़ने के लिए उठाया गया है, क्योंकि यह ड्रग ‘गरीबों की कोकीन’ बनकर तेजी से फैल रही थी।
क्या है यह ‘म्याऊं-म्याऊं’ का मायाजाल?
वैज्ञानिक भाषा में इसे मेफेड्रोन कहा जाता है, लेकिन नशा तस्करों ने इसे ‘M-Cat’ या ‘म्याऊं-म्याऊं’ जैसे अजीब नाम दिए हैं ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके। यह एक सिंथेटिक स्टिमुलेंट (कृत्रिम उत्तेजक) है, जो दिखने में सफेद पाउडर जैसा होता है। शुरुआती दौर में इसे इंटरनेट पर ‘पौधों की खाद’ या ‘बाथ साल्ट’ बताकर धड़ल्ले से बेचा गया। इसकी सबसे बड़ी मार युवाओं और कॉलेज जाने वाले छात्रों पर पड़ी है, क्योंकि कोकीन के मुकाबले यह काफी सस्ती और आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
शरीर को ‘कब्रिस्तान’ बना देता है यह पाउडर
डॉक्टरों और विशेषज्ञों की मानें तो म्याऊं-म्याऊं का सेवन इंसान को जिंदा लाश यानी ‘जॉम्बी’ में तब्दील कर देता है। इसके प्रभाव इतने डरावने हैं कि रूह कांप जाए:
मतिभ्रम (Hallucinations): नशा करने वाले को महसूस होता है कि उसकी त्वचा के नीचे कीड़े रेंग रहे हैं, जिससे वह खुद को ही लहूलुहान कर लेता है।
शारीरिक तबाही: नाक से लगातार खून आना, दिल की धड़कन का अनियंत्रित होना और अचानक वजन गिरना इसके प्राथमिक लक्षण हैं।
दिमागी असर: यह सीधा नर्वस सिस्टम पर हमला करता है, जिससे इंसान गहरे डिप्रेशन और सुसाइडल टेंडेंसी (आत्महत्या के विचार) का शिकार हो जाता है।
जानलेवा जोखिम: ओवरडोज की स्थिति में सीधे ब्रेन हेमरेज या कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) होने का खतरा बना रहता है।
सरकार का ‘मास्टरस्ट्रोक’: कच्चे माल पर प्रहार
मेफेड्रोन को साल 2015 में ही एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन चोरी-छिपे इसकी मैन्युफैक्चरिंग जारी थी। अब केंद्र सरकार ने इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख रसायन ‘2-ब्रोमो-4-मिथाइलप्रोपियोफेनोन’ को प्रतिबंधित सूची में डाल दिया है। अब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की अनुमति के बिना इस कैमिकल का उत्पादन, स्टॉक या बिक्री करना संगीन अपराध होगा। प्रशासन का मानना है कि कच्चे माल पर रोक लगने से इस ‘धीमे जहर’ की फैक्ट्रियों पर ताला लग जाएगा।