नई दिल्ली: देश में आम आदमी की जेब पर बोझ एक बार फिर बढ़ गया है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी महीने में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) बढ़कर 3.21% के स्तर पर पहुंच गई है। गौर करने वाली बात यह है कि जनवरी में यह दर महज 2.74% थी। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट बताती है कि इस उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों और कीमती धातुओं के दामों में आई तेजी है।
थाली से लेकर तिजोरी तक सब महंगा
फरवरी में खाद्य महंगाई दर (Food Inflation) में जोरदार इजाफा देखा गया है, जो जनवरी के 2.13% से बढ़कर 3.47% हो गई है। बाजार में टमाटर और गोभी जैसी सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, टमाटर की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले लगभग 45% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, वैश्विक अस्थिरता और ईरान युद्ध की आहट के बीच सोने-चांदी की कीमतों में आई तेजी ने भी महंगाई को हवा दी है।
शहरों के मुकाबले गांवों में ज्यादा असर
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो ग्रामीण भारत में महंगाई की मार शहरों से ज्यादा पड़ी है। ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 3.37% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.02% दर्ज की गई। शिक्षा और पर्सनल केयर जैसे सेगमेंट में भी महंगाई का दबाव बना हुआ है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट गड़बड़ा गया है।
ईरान युद्ध और कच्चे तेल का खतरा
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता के कारण मार्च में भी महंगाई का यह ट्रेंड जारी रह सकता है। वहीं, केयरएज की चीफ इकनॉमिस्ट रजनी सिन्हा का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं, तो वित्त वर्ष 2027 में महंगाई दर 5% की सीमा को भी लांघ सकती है।
RBI के रुख पर रहेगी नजर
महंगाई के इन आंकड़ों के बाद अब सबकी नजर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगली मौद्रिक नीति बैठक पर है। हालांकि, जानकारों का अनुमान है कि बढ़ती महंगाई के बावजूद RBI फिलहाल ब्याज दरों (Policy Rates) में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन बाजार में सतर्कता बनी रहेगी।