गरियाबंद आदि सनातन देवी देवता धर्म की स्थापना निराकार प्रकाश स्वरूप पारलौकिक पिता शिव परमात्मा ने प्रजापिता ब्रह्मा के सरकार माध्यम से सृष्टि के प्रारंभ से पूर्व पुरुषोत्तम संगम युग में किया था जिसके परिणाम स्वरूप भारत भूमि में देवी देवताओं का कर्तव्य भूमि, लीला भूमि रही है। उस समय एक धर्म, एक भाषा, एक संस्कृति और एक ही दैवी देवताओं वाला कुल था कालांतर में समय परिवर्तन के साथ-साथ मध्यकाल में अनेक धर्म, अनेक भाषाएं और अनेक प्रथाएं प्रारंभ हो गई और दैवीय शक्तियां विलुप्त हो गईं जिससे समाज अलग अलग वर्गों और समुदाय में विभाजित हो गया।
मानव समाज से दैवीय मूल्य विलुप्त होने से चारों तरफ भय, अशांति और नफरत का माहौल हो गया है, दिनों दिन अपराध बढ़ते जा रहे हैं, मानव जीवन अनिश्चिता के दौर से गुजर रहा है।
यह धर्मग्लानि का समय है, चारों तरफ धर्म के नाम से मारकाट मचा हुआ है। जबकि धर्म का असली स्वरूप है- प्रेम, शांति, दया, क्षमा और परोपकार। आज यह गुण लोप हो गया है और आज आसुरी अवगुणों ने उनका स्थान ले लिया है, परिणाम स्वरुप यह संसार जैसे नरक बन चुका है।
यह समय हीरे तुल्य है जबकि जगत नियंता पारलौकिक शिव पिता परमात्मा प्रजापिता ब्रह्मा के साकार तन में सनविष्ट होकर सृष्टि नवनिर्माण का दिव्य एवं अलौकिक कर्तव्य करते हुए 90 वर्ष हो चुके हैं, जिसकी वर्षगांठ हम 90 वीं शिव अवतरण वर्ष के रूप में मना रहे हैं।
यह उद्गार राजयोगी ब्रह्मा कुमार श्रवण कुमार ने दिए।
विगत दिवस, दिव्य एवं अलौकिक शक्ति केंद्र ओम शांति भवन रानीपरतेवा में त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव कार्यक्रम में दिए।
उन्होंने जन समुदाय का आवाहन करते हुए कहा यह समय आध्यात्मिक जागृति का है इसलिए इस समय को पहचानो अपने जीवन के महत्व को समझो और परमात्मा शिव द्वारा दिए जा रहे श्रीमत अनुसार श्रेष्ठ कर्म कर अनेक जन्मों के लिए श्रेष्ठ भाग्य बनाने का समय है।
याद रखो- अभी नहीं तो कभी नहीं।
सुख, शांति एवं संपत्ति आपका ईश्वरीय जन्म सिद्ध अधिकार है।
उक्त अवसर पर संस्था की संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अफसाना वंदना बहन जी ने पारलौकिक शिव पिता परमात्मा को भोग स्वीकार कराई, तत्पश्चात शिव ध्वजारोहण किया गया।
पूर्व जनपद पंचायत छुरा के पूर्व जनपद सदस्य नीलकंठ सिंह ठाकुर ने भी अपने प्रेरणादाई विचार रखें।
क्षेत्रीय संवाददाता पुनीत राम ठाकुर ने भी अपने विचार रखें।
उक्त कार्यक्रम में ग्राम पटेल साधुराम निषाद, दुखु राम बघेल, मधुसूदन साहू, माखनलाल कश्यप, सुलोचना, दुर्गा सिंहा, केवरा सोनी के अलावा बड़ी संख्या में ग्रामवासियों के अलावा रायपुर, फिंगेश्वरी, कसेकेरा, अकलवारा के लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम के सुचारू संचालन में ओम शांति भवन के संचालक बीके योगेश कुमार। कुंजरानी निषाद, वंदना कंवर, लता नेताम, भारती कुंभकार, कांति दीवान, कुसुम कुंभकार, कृतिका कुंभकार, कुलसिया ध्रुव, जगबाई कंवर, निरंजन कुंभकार, भुनेश्वर ध्रुव ने सहयोग दिया।
