मुंबई: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच फंसे 8 भारतीय नाविक रविवार को सुरक्षित भारत लौट आए हैं। डीजल तस्करी के आरोप में करीब 50 दिनों तक ईरान की जेल में रहने के बाद, इन नाविकों ने युद्ध के मैदान से निकलकर आर्मेनिया के रास्ते मुंबई तक का सफर तय किया। वतन वापसी पर नाविकों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए उन भयावह पलों को साझा किया, जब वे बिना पैसे और भोजन के युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे हुए थे।
जेल से रिहाई के अगले ही दिन छिड़ गई जंग यूएई के टैंकर जहाज एमटी वैलियंट रोआ के चालक दल को दिसंबर 2025 में ईरान ने हिरासत में लिया था। भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप के बाद उन्हें 27 फरवरी को रिहाई मिली, लेकिन विडंबना यह रही कि अगले ही दिन क्षेत्र में युद्ध शुरू हो गया। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव ने बताया कि सभी 8 नाविक रविवार सुबह 8 बजे आर्मेनिया के रास्ते मुंबई पहुंचे। जेल में रहने के दौरान उनका सामान गुम हो गया था और वे अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे। यूनियन द्वारा अब उनके रहने और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
भूख और डर के बीच 1800 किलोमीटर की यात्रा भारतीय नौसेना के पूर्व कप्तान विजय कुमार ने बताया कि ईरान में बिताया गया समय अत्यंत कष्टदायक था। युद्ध शुरू होने के बाद स्थिति काफी अनिश्चित हो गई थी। उनके पास पैसे नहीं थे, लेकिन किसी तरह एक टैक्सी का प्रबंध किया गया जिसने आर्मेनिया सीमा तक पहुंचने के लिए 3000 डॉलर मांगे। उन्होंने लगभग 1800 किलोमीटर का सफर तय किया, जिस दौरान कई दिनों तक उन्हें भोजन भी नसीब नहीं हुआ। उन्होंने संकट की इस घड़ी में निरंतर सहयोग के लिए भारतीय दूतावास और भारत सरकार का आभार व्यक्त किया है।
गोलीबारी के बीच हुई थी गिरफ्तारी जहाज पर तैनात ऑयलर मसूद आलम ने बताया कि उनकी गिरफ्तारी उस समय हुई थी जब वे ईरान के पास एक दूसरे जहाज की मदद करने जा रहे थे। अचानक ईरानी नौसेना ने वहां पहुंचकर गोलीबारी शुरू कर दी और उन्हें हिरासत में ले लिया गया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि जेल में उनके साथ शारीरिक यातना नहीं दी गई, लेकिन परिवार से दूर अनिश्चितता के माहौल में वे काफी दुखी थे। मसूद ने कहा कि अपने देश वापस आकर उन्हें बहुत सुकून मिल रहा है। सभी नाविकों के परिजनों ने उनकी सुरक्षित वापसी पर राहत की सांस ली है।