चंदौली/वाराणसी: मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के करधना गांव में घटित एक दिल दहला देने वाली घटना में तीन मासूम बच्चियों की मौत हो गई। खेल-खेल में जहरीली कनेर की फली को ‘आंवला’ समझकर खाना बच्चों के लिए जानलेवा साबित हुआ। इस हृदयविदारक हादसे ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है, जिसके बाद अब राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है।
आंवला समझकर खाया ‘काल’ का बीज यह दर्दनाक हादसा रविवार सुबह उस वक्त हुआ जब गांव के बच्चे घर के पास खेल रहे थे। बच्चों को कनेर की फली मिली, जिसे उन्होंने अनजाने में आंवला समझकर खा लिया। जहरीले बीज का असर होते ही तीनों बच्चियों—हर्षिता (6 वर्ष), अंशिका (3 वर्ष) और नैंसी (4 वर्ष)—को उल्टियां और पेट दर्द शुरू हो गया।
24 घंटे में उजड़ गए दो घर जहर का असर इतना घातक था कि एक के बाद एक तीनों बच्चियों ने दम तोड़ दिया:

रविवार शाम: हर्षिता को डॉक्टरों ने मृत घोषित किया।
सोमवार दोपहर: छोटी बहन अंशिका की इलाज के दौरान मौत हो गई।
सोमवार शाम: पड़ोसी की बेटी नैंसी ने बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में दम तोड़ा।
परिजनों ने दो बच्चियों का अंतिम संस्कार पुलिस को सूचना दिए बिना ही कर दिया, जबकि तीसरी बच्ची नैंसी का पोस्टमार्टम कराया गया।
मानवाधिकार आयोग की सख्ती और डीएम को नोटिस इस मामले को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता अधिवक्ता खालिद वकार आबिद ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और प्रशासनिक लापरवाही को इन मौतों का जिम्मेदार ठहराया।
शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने 08 जनवरी 2026 को आदेश जारी कर जिलाधिकारी (DM), वाराणसी से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि:
पूरी घटना की गहन जांच की जाए।
जांच प्रक्रिया में शिकायतकर्ता अधिवक्ता को भी शामिल किया जाए।
16 फरवरी 2026 तक हर हाल में रिपोर्ट पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी 2026 को होगी।
इस घटना के बाद से क्षेत्र में मातम पसरा है और जहरीले पेड़-पौधों के प्रति जागरूकता फैलाने की मांग जोर पकड़ रही है।