Traffic Police Bhatapara :  मंजूर है चालानी कार्रवाई…पूरा शहर अस्त-व्यस्त यातायात के घेरे में…..पढ़े पूरी खबर

Traffic Police Bhatapara :

राजकुमार मल

Traffic Police Bhatapara :   मंजूर है चालानी कार्रवाई…पूरा शहर अस्त-व्यस्त यातायात के घेरे में

 

Traffic Police Bhatapara : भाटापारा- मंजूर है चालान की कार्रवाई। यह सोच प्रमाणित करता है कहीं भी वाहन पार्किंग, तेज गति से वाहन चालान जैसे दृश्य का हर समय देखा जाना। हद तो तब, जब यातायात पुलिस कार्यालय के ठीक सामने यह नियम विरुद्ध गतिविधियां किसी भी समय देखी जा सकती हैं।

बहुत नहीं, महज चार दिन ही गुजरे हैं, जब श्री राम नाम सप्ताह के समापन दिवस पर निकली शोभा यात्रा के दौरान चुस्त पुलिसिंग देखी गई थी। अब एक बार फिर से सुस्त व्यवस्था देखने में आने लगी है। चौक-चौराहे ही नहीं बल्कि पूरा शहर अस्त-व्यस्त यातायात के घेरे में है। ऐसे में केवल एक सलाह- वाहन धीमा चलाएं। पुलिस से कोई मदद नहीं मिलेगी।

यहां ध्वस्त

Traffic Police Bhatapara : सीजन या ऑफ सीजन। अवकाश के दिन हों या ना हों। बस स्टैंड चौक हमेशा अस्त-व्यस्त यातायात के साए में होता है। अघोषित टैक्सी स्टैंड का पूरा योगदान मिलता है अव्यवस्था को बढ़ाने में। सड़क के एक किनारे पर लगने वाले सब्जी बाजार की भी अहम हिस्सेदारी जोड़ी जानी चाहिए। करीब ही है कृषि उपज मंडी। ऐसे में उपज से भरी, भारी वाहनें। अस्त-व्यस्त यातायात के ताबूत में अंतिम कील मानी जा रही है।

यहां हमेशा

महारानी चौक, मुंगेली मोटर स्टैंड, सरकारी अस्पताल चौक, जय स्तंभ चौक, स्टेशन तिराहा और गोविंद चौक। शहर के यातायात दबाव वाले क्षेत्र माने जाते हैं। होनी चाहिए यातायात जवानों की मौजूदगी लेकिन नजर नहीं आते। फलत: इन जगहों पर अनाधिकृत पार्किंग आकार ले चुकी है। सुगम आवाजाही को बाधित करने में संस्थानें भी पीछे नहीं हैं, जिनकी प्रचार सामग्री सड़क पर ही रखी जाती है।

मंजूर है दंड

 

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Traffic Police Bhatapara : नियमित तो नहीं लेकिन कभी- कभार होने वाली जांच कार्रवाई में जो मामले बनते हैं उनसे सीख लेने जैसी इच्छा शक्ति नजर नहीं आती। फलत: औपचारिकता बनती जा रही है चालानी कार्रवाई। सुव्यवस्थित कारोबारी माहौल बने, इसकी कोशिश पालिका प्रशासन ने कभी नहीं की। यही वजह है कि शहर में प्रतिबंधित प्लास्टिक बैग खूब बिक रहे हैं। उपयोग के बाद नालियां इनका अंतिम ठिकाना बनते हैं। सवाल- अच्छे दिन कब आएंगे ?