29.2 C
Chhattisgarh

The tempting promises of Liz Truss लिज ट्रस के लुभावने वादे

UncategorizedThe tempting promises of Liz Truss लिज ट्रस के लुभावने वादे

The tempting promises of Liz Truss लिज ट्रस के लुभावने वादे

The tempting promises of Liz Truss लिज ट्रस के लुभावने वादे

The tempting promises संभावना जताई जा रही है कि ट्रस को अपने वादों पर पुनर्विचार करना होगा। लेकिन उस हाल में उन पर वादाखिलाफी का आरोप लगेगा। वैसे राजनीति में ऐसे आरोप नए नहीं हैं। ना ही लिज ट्रस को कोई नैतिकतावादी नेता समझा जाता है।
ब्रिटेन में अब यह मान कर चला जा रहा है कि लिज ट्रस अगली प्रधानमंत्री होंगी।

https://jandhara24.com/news/109790/the-dead-body-of-the-middle-aged-found-in-the-breaking-kachana-pond-sensation-spread-in-the-area/

The tempting promises ब्रिटिश विश्लेषकों का आकलन है कि पांच सितंबर को कंजरवेटिव पार्टी का नेता चुने जाने के बाद लिज ट्रस छह सितंबर को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगी। इसलिए अब वे ही चर्चा के केंद्र में हैं।

तो उनके उन वादों पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है, जो उन्होंने छह हफ्ते तक नेता पद के चुनाव के लिए चले प्रचार अभियान के दौरान किए हैं। आलोचकों ने कहा है कि इस दौरान ट्रस ने आसमान से तारे तोड़ कर लाने जैसे वायदे लोगों से किए हैँ।

मसलन, उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद पहले ही पहले ही दिन वे टैक्स में कटौती का फैसला करेंगी। इसके साथ ही उन्होंने महंगाई और ऊर्जा संकट की मार झेल रहे परिवारों की सहायता के लिए विशेष कदम उठाने का वादा भी किया है। जाहिर है, इन वादों के पूरा होने को लेकर अब शक जताया जा रहा है। लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि ये वादे वे कैसे पूरा करेंगी।

फिलहाल, उनके सामने लगभग एक लाख 80 हजार कंजरवेटिव पार्टी के सदस्य हैं। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो निम्न टैक्स और न्यूनतम सरकार की नीति में यकीन करते हैं। लेकिन कंजरवेटिव पार्टी ही देश नहीं है। देश में विभिन्न तबके हैं, जिनकी अलग-अलग जरूरतें हैं। जिस समय देश मंदी के सामने है, अगर उन्होंने पार्टी के धनी समर्थक वर्ग को खुश करने के लिए उस समय 30 बिलियन पाउंड की टैक्स कटौती की भी, तो उसे कैसे वाजिब ठहराएंगी?

Growing corruption in india भारत में बढ़ता भ्रष्टाचार

फिर उन्होंने आम परिवारों को भी मदद देने का वादा किया है। क्या इसके लिए उनकी सरकार कर्ज लेगी? कंजरवेटिव समर्थक सरकार पर कर्ज का बोझ बढऩे या राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी को भी पसंद नहीं करते। ऐसे में संभावना यह जताई जा रही है कि ट्रस को अपने वादों पर पुनर्विचार करना होगा। लेकिन उस हाल में उन पर वादाखिलाफी का आरोप लगेगा। लेकिन राजनीति में ऐसे आरोप नए नहीं हैं। ना ही लिज ट्रस को कोई नैतिकतावादी नेता समझा जाता है।

Check out other tags:

Most Popular Articles