aajkijandhara

Transfer ट्रांसफर के नाम पर महिला कर्मचारी को अपने पास बुलाने का ऑडियो सोशल मिडिया पर वायरल

(Story of churning of ocean) आचार्य राजेंद्र महाराज ने प्रकट किया वामन अवतार समुद्र मंथन की कथा

(Story of churning of ocean)

(Story of churning of ocean)  सभी प्रकार के पापों को हरने वाला है भगवान का नाम

(Story of churning of ocean)

(Story of churning of ocean) सक्ती ! दीपका मे सोनी परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन व्यासपीठ से आचार्य राजेंद्र शर्मा ने वामन अवतार समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान का नाम सभी प्रकार के पापों को हरने वाला है l

इस कलयुग में भगवान का नाम ही सर्वोपरि है , इसलिए अपनी आस्था विश्वास और धर्म का आश्रय लेकर अपने अंत समय में भगवान का नाम लेना ही चाहिए जिससे भावी जन्म सुधरता है l

(Story of churning of ocean) अंत समय में जिस प्रकार मनुष्य की मती होती है उसी प्रकार उसकी गति भी बनती है l अजामिल नाम के ब्राह्मण ने अपने बेटे का नाम संतो के कहने पर नारायण रखा था और यही नारायण नाम कहने से ही वह मृत्यु और नरक की यात्रा से अपने आप को बचा लिया यह उद्गार दीपिका के शक्ति नगर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन व्यासपीठ से आचार्य राजेंद्र महाराज ने प्रकट किया l

आचार्य ने बताया की संसार के समस्त प्राणी अपने कर्मों के कारण ही अलग-अलग योनियों में जन्म प्राप्त करते हैं किंतु भगवान का अवतार तो संपूर्ण विश्व के कल्याण करने के लिए ही होता है l

 

(Story of churning of ocean) समुद्र मंथन प्रसंग की कथा कहते हुए आचार्य ने कहा कि भागवत कथा रूपी अमृत भी सबको प्राप्त नहीं होता जिस प्रकार समुद्र मंथन में देवताओं और दानवों दोनों ने एक ही समय पर एक ही लक्ष्य के लिए एक समान ही परिश्रम किया था किंतु अमृत केवल देवताओं को ही प्राप्त हुआ l

कथा स्थल में बैठ कर के भी जिनका मन दुनिया की माया में फंसा रहता है उन्हें भी कथामृत प्राप्त नहीं होता , मनुष्य का मन बड़ा विचलित रहता है पल भर में ही वह शरीर को छोड़कर यत्र तत्र भागता है , इसलिए कथा में बैठने से और भी ज्यादा जरूरी है की कथा श्रोता के अंदर बैठे तभी जीवन की व्यथा दूर होती है l केवल सुनने के लिए ही कथा नहीं सुनना चाहिए बल्कि उसे अपने अंतःकरण में उतार कर जीवन में परिवर्तन भी दिखना जरूरी है l


चौथे दिन की कथा में आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने वामन अवतार , श्री राम चरित्र एवं श्री कृष्ण प्राकट्य उत्सव का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि , अपने संपूर्ण कर्म भगवान को सौंप देने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है l राजा बलि ने अपना सर्वस्व भगवान को दान में दे दिया तो भगवान राजा बलि के रीणी बन गए और भगवान ने कहा कि मैं पल प्रतिपल तुम्हारी रक्षा करूंगा !

फिर भगवान राजा बलि के साथ पातालपुरी जाकर उनके द्वारपाल भी बने l धर्म के चार चरण में वर्तमान कलयुग में केवल एक ही चरण जो दान स्वरूप है सुरक्षित है इसलिए इस युग में दान की बड़ी प्रबलता दिखाई दे रही है , सत्य , तपस्या और दया यह तीनों चरण कलयुग के प्रारंभ होते ही नष्ट हो चुके हैं l

भगवान श्री राम की कथा मनुष्य जीवन के लिए बड़ी अद्भुत प्रेरणा है , जिससे अनुप्राणित होकर जीवन सफल एवं सिद्ध हो सकता है , इसलिए राम के आदर्शों को हम अपने जीवन में उतारे , तभी तो दुनिया की सभी मां चाहती हैं कि मेरा बेटा आराम जैसा ही बने और सभी बेटियां चाहती हैं कि मेरे पिता आराम जैसे ही हो l

(Story of churning of ocean) सभी कथा श्रोताओं ने भागवत कथा रसपान के साथ जीवंत झांकियों एवं संस्कृतम् तथा सत्संग का लाभ उठाया , इस अवसर पर मृत्युंजय चौबे , संजय देवांगन , कुसुमलता पार्षद , शत्रुघ्न सोनी , लक्ष्मी सोनी मेघनाथ देवांगन , गोपाल सोनी देवी सोनी , आदि सैकड़ों श्रोता उपस्थित थे l भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के आयोजक बजरंगलाल श्रीमती आशा रानी सोनी एवं प्रियदर्शिनी सोनी द्वारा अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण करने का आग्रह किया गया है l

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *